ग्रीन क्रेडिट योजना में पौधा तैयारी के नाम पर 1.80 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
मरवाही वनमंडल में 3 लाख पौधों की फर्जी तैयारी दिखाकर राशि निकालने की शिकायत
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला के वन विभाग के अंतर्गत आने वाले मरवाही वन मंडल में ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत एक बड़े वित्तीय घोटाले के आरोप सामने आए हैं। शिकायत के अनुसार वन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर पौधा तैयारी केवल कागजों में दिखाकर लगभग 1 करोड़ 80 लाख रुपये की राशि का फर्जी भुगतान कर लिया। मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है।
500 हेक्टेयर प्लांटेशन के लिए 3 लाख पौधों की तैयारी का प्रस्ताव
जानकारी के अनुसार ग्रीन क्रेडिट योजना के अंतर्गत मरवाही वनमंडल के मरवाही, पेंड्रा, गौरेला और खोडरी वन परिक्षेत्र में लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचित प्लांटेशन किया जाना प्रस्तावित था। इस योजना के तहत करीब 3 लाख टाल प्लांट पौधे तैयार किए जाने थे। विभागीय रिकॉर्ड में एक पौधे की तैयारी की लागत 60 रुपये दर्शाई गई है। इस प्रकार पौधा तैयारी के नाम पर कुल लगभग 1 करोड़ 80 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर खर्च दिखाया गया।
पौधों की तैयारी केवल कागजों में दिखाने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वास्तविक रूप से पौधों की तैयारी नहीं की गई, बल्कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर कागजों में ही पौधे तैयार दिखाकर पूरी राशि निकाल ली। आरोप है कि इस काम के लिए फर्जी बिल और वाउचर तैयार किए गए तथा कुछ फर्मों के माध्यम से सामग्री सप्लाई का कागजी रिकॉर्ड बनाया गया। इसके साथ ही मजदूरी भुगतान भी फर्जी मजदूरों के नाम से दर्शाया गया। इस तरह पूरी राशि का भुगतान कर लिया गया जबकि वास्तविक पौधा तैयारी का कार्य नहीं हुआ।
मनरेगा के पौधों को ग्रीन क्रेडिट योजना में दिखाने का आरोप
मामले में यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि जिन पौधों की तैयारी के लिए ग्रीन क्रेडिट योजना से राशि निकाली गई, वे वास्तव में तैयार ही नहीं किए गए। बाद में रोपण कार्य के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत तैयार किए गए लगभग 1 से 2 फीट ऊंचाई के पौधों को ही उपयोग में लाकर ग्रीन क्रेडिट योजना के पौधे बताकर रोपण कर दिया गया। इस तरह दो अलग-अलग योजनाओं को जोड़कर सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया जा रहा है।
चार माह में टाल प्लांट तैयार दिखाने पर उठे सवाल
वन विशेषज्ञों के अनुसार टाल प्लांट पौधे तैयार होने में सामान्यतः कम से कम एक वर्ष का समय लगता है। लेकिन इस मामले में दस्तावेजों में मात्र चार महीने के भीतर पौधे तैयार दिखा दिए गए हैं। इतनी कम अवधि में इतने बड़े पैमाने पर पौधों की तैयारी संभव नहीं मानी जाती। इसी वजह से पूरे मामले को गंभीर अनियमितता माना जा रहा है और इसकी जांच की मांग उठ रही है।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगे आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस पूरे मामले में विभाग के कई जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। जिनके नाम सामने आए हैं उनमें रोपनी प्रभारी सधवानी, उदय तिवारी, राकेश राठौर, चिचगोहना रोपनी प्रभारी तिवारी, राकेश पंकज तथा पेंड्रा क्षेत्र के इंदिरा उद्यान रोपनी प्रभारी और परिक्षेत्र सहायक शामिल बताए जा रहे हैं।
आरोप है कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और पौधा तैयारी के नाम पर राशि निकालने में भूमिका निभाई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी योजनाओं के धन का बड़ा दुरुपयोग है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले में यह भी मांग की जा रही है कि पौधा तैयारी की स्वीकृति, सामग्री सप्लाई, बीज खरीदी और नर्सरी से जुड़े सभी दस्तावेजों की गहन जांच कराई जाए।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT








