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गौरेला पेंड्रा मरवाही: फाइल में पंचायत NOC नहीं, फिर भी जमीन का डाइवर्सन मंजूर! मरवाही SDM कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में”

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बिना पंचायत NOC के जमीन का डाइवर्सन?  मरवाही SDM में बड़ा राजस्व खेल उजागर, अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की सकोला तहसील में जमीन डाइवर्सन को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत की अनापत्ति के बिना ही जमीन का डाइवर्सन कर दिया गया और आदेश में पंचायत NOC संलग्न होने का उल्लेख कर दिया गया, जबकि फाइल में ऐसा कोई दस्तावेज मौजूद ही नहीं है।
मामले के अनुसार संबंधित भूमि ग्राम पंचायत मड़ई क्षेत्र में स्थित बताई जा रही है, लेकिन डाइवर्सन आदेश में ग्राम पंचायत सेखवा का अनापत्ति प्रमाणपत्र संलग्न होने का उल्लेख किया गया है। यह विरोधाभास तब और गंभीर हो गया जब आवेदक द्वारा एसडीएम कार्यालय से डाइवर्सन प्रकरण में संलग्न पंचायत NOC की प्रमाणित प्रति मांगी गई। इसके जवाब में एसडीएम कार्यालय ने लिखित रूप से स्पष्ट कर दिया कि संबंधित फाइल में ग्राम पंचायत का कोई अनापत्ति प्रमाणपत्र संलग्न ही नहीं है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब फाइल में पंचायत का NOC मौजूद ही नहीं है तो डाइवर्सन आदेश में उसका उल्लेख किस आधार पर कर दिया गया। क्या यह केवल टाइपिंग की गलती है या फिर राजस्व विभाग के भीतर किसी बड़े खेल का हिस्सा? यदि फाइल में NOC नहीं है तो डाइवर्सन की अनुमति आखिर किन दस्तावेजों के आधार पर दी गई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में सामान्यतः ग्राम पंचायत की अनापत्ति के बिना जमीन का डाइवर्सन किया ही नहीं जाता। ऐसे में बिना NOC के डाइवर्सन आदेश जारी होना सीधे-सीधे राजस्व प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है और यह संदेह भी पैदा करता है कि कहीं इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर मिलीभगत तो नहीं हुई।
विवादित भूमि की भू-स्वामी के रूप में सेखवा निवासी बेबीलता प्रजापति का नाम सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि उनके पति शंकर प्रजापति पेशे से शिक्षक हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यही शंकर प्रजापति पहले भी जिले में भूमि से जुड़े कई विवादों और आरोपों को लेकर चर्चा में रहे हैं। कई लोगों द्वारा उन पर सरकारी जमीन को निजी भूमि में बदलकर बैंक से बड़ी राशि के ऋण ने जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने की बातें भी सामने आती रही हैं, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
लेकिन इस पूरे मामले ने सबसे बड़ा सवाल राजस्व विभाग और एसडीएम कार्यालय की कार्यप्रणाली पर खड़ा कर दिया है। आखिर बिना पंचायत NOC के जमीन का डाइवर्सन कैसे हो गया? क्या डाइवर्सन आदेश जारी करने से पहले दस्तावेजों की जांच नहीं की गई, या फिर जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज किया गया?
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। लोगों ने मांग की है कि इस डाइवर्सन प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या मिलीभगत पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और लाभार्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर इस संदिग्ध डाइवर्सन प्रकरण में सच्चाई सामने लाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
Ritesh Gupta
Author: Ritesh Gupta

Professional JournalisT

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