कोरबा/कटघोरा। कटघोरा को जिला बनाए जाने की वर्षों पुरानी और जनहित से जुड़ी मांग एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुँचती नजर आ रही है। शासन-प्रशासन की लंबी चुप्पी और लगातार टालमटोल से क्षुब्ध अधिवक्ता संघ कटघोरा ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संघ ने स्पष्ट किया है कि 30 जनवरी 2026 से कटघोरा न्यायालय परिसर के सामने अनिश्चितकालीन क्रमिक धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कटघोरा क्षेत्र भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक जरूरत, जनसंख्या घनत्व एवं आर्थिक गतिविधियों की दृष्टि से जिला बनने के सभी मापदंडों को वर्षों पहले ही पूरा कर चुका है। इसके बावजूद जिला निर्माण की फाइलें अब तक सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं, जिससे क्षेत्र के लाखों नागरिकों को रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों के लिए कोरबा व अन्य जिलों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
संघ ने आरोप लगाया कि जिला न बनने के कारण स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, पुलिस एवं न्यायिक सेवाओं पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। विकास योजनाएं कागजों तक सीमित रह जा रही हैं और क्षेत्र लगातार पिछड़ता जा रहा है। यह स्थिति अब किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। अधिवक्ता संघ ने बताया कि पूर्व में अनेक बार शासन को ज्ञापन सौंपे गए, शांतिपूर्ण धरने दिए गए और जनप्रतिनिधियों से संवाद भी किया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। अब संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक कटघोरा को जिला बनाए जाने पर ठोस और समयबद्ध निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
संघ ने इस आंदोलन को सिर्फ अधिवक्ताओं का नहीं, बल्कि पूरे कटघोरा अंचल की लड़ाई बताते हुए सभी सामाजिक संगठनों, व्यापारी संघों, किसान संगठनों, युवा मंचों, छात्र संगठनों एवं आम नागरिकों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और अनुशासित तरीके से संचालित किए जाने की बात भी दोहराई गई है।
धरना प्रदर्शन की घोषणा के बाद कटघोरा सहित आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यदि शासन ने जल्द ही इस मांग पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
Author: Saket Verma
A professional journalist







