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किराना दुकान की आड़ में लाखों का खेल! पसान वन परिक्षेत्र में डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी से जुड़ा एक और नया घोटाला उजागर, गबन और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

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किराना दुकान की आड़ में लाखों का खेल! पसान वन क्षेत्र में डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी से जुड़ा एक और नया घोटाला उजागर, गबन और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
कोरबा (छत्तीसगढ़)। पसान वन परिक्षेत्र में कथित फर्जीवाड़े का एक और मामला सामने आने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार विभागीय योजनाओं के नाम पर सरकारी राशि के दुरुपयोग और गबन का यह नया मामला पसान वन क्षेत्र में पदस्थ डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी से जुड़ा बताया जा रहा है। इस खुलासे ने यह संकेत दिया है कि कथित अनियमितताएं किसी एक योजना तक सीमित नहीं, बल्कि घोटालों की एक लंबी कड़ी हो सकती हैं।
सूत्रों का दावा है कि पौधारोपण, नर्सरी, स्टॉपडेम, सिंचित प्लांटेशन सहित कई विभागीय कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। कागजों में कार्य पूरे दिखाए गए, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट बताई जा रही है। इससे यह आशंका और गहरी होती जा रही है कि विभागीय राशि का सुनियोजित तरीके से दुरुपयोग किया गया।
किराना दुकान से जुड़ा नया मामला, जिसने खोली एक और परत
इसी क्रम में अब किराना दुकान से जुड़ा एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सूत्रों का आरोप है कि डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी द्वारा ही किराना दुकान संचालक पिंकी, पिता बेचुराम तनेरा, के बैंक खाते में प्रतिमाह लाखों रुपये डलवाए जाते रहे। बताया जा रहा है कि यह राशि मजदूरी भुगतान के नाम पर ट्रांसफर की जाती थी।
सूत्रों के अनुसार यह कथित फर्जी भुगतान कोई तात्कालिक घटना नहीं, बल्कि कई वर्षों से लगातार जारी रहा। मजदूरों के नाम पर स्वीकृत सरकारी राशि को किराना व्यापारी के खाते में भेजकर सरकारी धन के दुरुपयोग और गबन की आशंका जताई जा रही है।
नए खुलासे से घोटालों की फेहरिस्त और लंबी”
स्थानीय लोगों का कहना है कि किराना दुकान से जुड़ा यह नया मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी से जुड़े कथित घोटालों की फेहरिस्त बढ़ती जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे यह समझा जा सकता है कि किस स्तर तक बेमानी संपत्ति अर्जित की गई होगी और विभागीय तंत्र ने इतने लंबे समय तक इस पर आंखें क्यों मूंदे रखीं। अब यह सवाल और तेज हो गया है कि इतनी बड़ी राशि का वास्तविक लाभार्थी कौन है, और क्या यह पूरा खेल विभागीय संरक्षण के बिना संभव था?
इससे समझा जा सकता है घोटाले की गहराई”
सूत्रों का कहना है कि सामने आ रहे तथ्यों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभागीय कार्यों में किस कदर कथित तौर पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया। आरोप है कि योजनाओं के लिए आवंटित सरकारी राशि का दुरुपयोग कर गबन किया गया, जिससे सीधे तौर पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
कार्रवाई की मांग तेज
मामले को लेकर क्षेत्र में जबरदस्त आक्रोश है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की लोकायुक्त, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) या किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
फिलहाल डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी, किराना व्यापारी मीनू पिता बेचुराम तनेरा या वन विभाग की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
Saket Verma
Author: Saket Verma

A professional journalist

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