मेडिकल कैशलेस सुविधा को बजट में शामिल करने की मांग फिर उठी__मेडिकल कैशलेस कर्मचारी कल्याण संघ ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य व वित्त मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही (जीपीएम)
प्रदेशव्यापी ज्ञापन अभियान के तहत सौंपा गया ज्ञापन
छत्तीसगढ़ कैशलेस चिकित्सा सेवा कर्मचारी कल्याण संघ द्वारा मेडिकल कैशलेस सुविधा को पुनः लागू करने एवं आगामी बजट में शामिल करने की मांग को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद की गई है। इसी क्रम में गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले में कलेक्टर के माध्यम से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
संगठन के प्रदेश नेतृत्व द्वारा 2 फरवरी से 5 फरवरी तक पूरे प्रदेश में ज्ञापन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत विधायक, मंत्री एवं कलेक्टरों के माध्यम से शासन तक कर्मचारियों की मांग पहुंचाई जा रही है।
कर्मचारियों व पेंशनरों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग
ज्ञापन के माध्यम से छत्तीसगढ़ के समस्त शासकीय कर्मचारियों, पेंशनरों एवं उनके परिवारजनों के लिए मेडिकल कैशलेस सुविधा प्रदेश में शीघ्र लागू करने की मांग की गई है। संगठन ने कहा कि यह सुविधा कर्मचारियों के लिए अत्यंत आवश्यक हो चुकी है।
महंगाई के दौर में इलाज बन रहा बड़ी समस्या
संगठन का कहना है कि वर्तमान महंगाई के इस दौर में कर्मचारियों को इलाज कराना बेहद कठिन हो गया है। गंभीर बीमारी की स्थिति में कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। कई बार इलाज के खर्च के लिए कर्मचारियों को अपनी वर्षों की जमा पूंजी, बच्चों की पढ़ाई व भविष्य के लिए संचित धनराशि खर्च करनी पड़ती है।
इलाज के लिए बिक रही जमीन और गहने
स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि कर्मचारियों को बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए खरीदी गई जमीन तक बेचनी पड़ जाती है। कई मामलों में बेटियों की शादी के लिए बनवाए गए गहने भी बेचने पड़ते हैं। मजबूरी में कर्मचारियों को ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है, क्योंकि विपरीत परिस्थितियों में सहारा देने वाला कोई नहीं होता।
अन्य विभागों से तुलना कर जताई नाराजगी
संगठन ने एसईसीएल एवं भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कर्मचारियों के इलाज का संपूर्ण खर्च शासन द्वारा वहन किया जाता है, जिससे वे मानसिक रूप से निश्चिंत रहते हैं। वहीं राज्य के शासकीय कर्मचारी इस सुविधा से वंचित हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
ओपीडी से लेकर इलाज तक कैशलेस सुविधा की मांग
मेडिकल कैशलेस कर्मचारी कल्याण संघ ने शासन से मांग की है कि कर्मचारी एवं उनके परिवारजनों के संपूर्ण इलाज की व्यवस्था कैशलेस सुविधा के माध्यम से की जाए। इसमें ओपीडी परामर्श, सभी प्रकार की जांच, एंबुलेंस सुविधा एवं संपूर्ण उपचार शामिल किया जाए, ताकि बीमारी के ठीक होने तक इलाज की पूरी जिम्मेदारी शासन द्वारा ली जा सके।
विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा
संगठन के प्रयासों से पूर्व में कई विधानसभा सत्रों के दौरान छत्तीसगढ़ के विधायकों द्वारा मेडिकल कैशलेस सुविधा लागू करने को लेकर प्रश्न लगाए जा चुके हैं। उस समय शासन द्वारा इस सुविधा को प्रक्रिया में बताया गया था। संगठन का मानना है कि अब समय आ गया है कि इस पर ठोस निर्णय लिया जाए।
इस बार सकारात्मक निर्णय की उम्मीद
संगठन के शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि लगातार संवाद, मुलाकात एवं आंदोलनों के चलते इस बार शासन कर्मचारियों की इस मांग को गंभीरता से लेते हुए उन्हें एक बड़ा तोहफा दे सकता है। इसी आशा के साथ यह ज्ञापन सौंपा गया है।
बड़ी संख्या में पदाधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर संगठन के संस्थापक सदस्य एवं प्रदेश संयोजक पीयूष कुमार गुप्ता के नेतृत्व में जीपीएम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम में कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के संयोजक डॉ. संजय शर्मा, मेडिकल कैशलेस कर्मचारी कल्याण संघ के जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश सोनवानी, महासचिव अजय चौधरी, समग्र शिक्षक फेडरेशन के जिला अध्यक्ष दिनेश राठौर, गौरेला ब्लॉक अध्यक्ष महेंद्र मिश्रा, पेंड्रा ब्लॉक अध्यक्ष परसराम चौधरी, के. चंद्रशेखर सहित संगठन के बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT








