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पीएम श्री एकलव्य विद्यालय छुरी में कलेक्टर दर घोटाले की बू! महिला कर्मचारी का सनसनीखेज आरोप—अधीक्षिका बबीता व प्राचार्य डॉ. अरशद अली ने किया मानदेय में खेल

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कोरबा/छुरी। पीएम श्री एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय छुरी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला सीधे-सीधे कलेक्टर दर से मानदेय भुगतान में भारी अनियमितता और कर्मचारियों के आर्थिक शोषण का है। विद्यालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने अधीक्षिका बबीता यादव एवं प्राचार्य डॉ. अरशद अली पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
महिला कर्मचारी का आरोप है कि शासन द्वारा तय कलेक्टर दरों को ताक पर रखकर जानबूझकर कम मानदेय दिया गया, जबकि कागजों में नियमों का पालन दर्शाया गया। सवाल यह है कि जब दरें स्पष्ट हैं, तो आखिर किसके संरक्षण में यह खुला खेल चल रहा था?
पीड़िता का कहना है कि जब उन्होंने इस अनियमितता पर आवाज उठाई, तो उन्हें दबाने और टालने की कोशिश की गई। न तो कोई लिखित जवाब दिया गया और न ही भुगतान में सुधार किया गया। इससे साफ है कि मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश का भी हो सकता है। सूत्रों की मानें तो विद्यालय में अन्य कर्मचारियों को भी कलेक्टर दर से कम भुगतान किए जाने की चर्चाएं लंबे समय से चल रही थीं, लेकिन डर और दबाव के चलते कोई सामने नहीं आ रहा था। अब महिला कर्मचारी के खुलकर सामने आने से पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पीड़िता आशा बाई का बयान —
“मैं आशा बाई, बीपी एवं शुगर जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित हूं। इसके बावजूद मुझे प्राचार्य एवं अधीक्षिका द्वारा लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे मैं गहरे डिप्रेशन में चली गई हूं। यदि भविष्य में मुझे शारीरिक या मानसिक रूप से कोई भी क्षति होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित प्राचार्य एवं अधीक्षिका की होगी।”
सबसे बड़ा सवाल यह है कि – 
👉 क्या जिला प्रशासन की नाक के नीचे नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं?
👉 क्या सरकारी योजनाओं के नाम पर कर्मचारियों की जेब काटी जा रही थी?
👉 और अगर आरोप सही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कब गिरेगी गाज?
महिला कर्मचारी ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच, बकाया मानदेय भुगतान और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी है कि यदि मामले को दबाने की कोशिश की गई तो वह लिखित शिकायत और दस्तावेजों के साथ आगे जाएगी।
वहीं, समाचार लिखे जाने तक अधीक्षिका बबीता यादव एवं प्राचार्य डॉ. अरशद अली की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, जो संदेह को और गहरा करता है। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर टिकी हैं—
क्या होगा जांच का आदेश या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?

Saket Verma
Author: Saket Verma

A professional journalist

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