जनपद पंचायत गौरेला में भ्रष्टाचार की बुनियाद पर बन रही पार्किंग: पंचायत के अधिकारों का खुला उल्लंघन, 19 लाख DMF मद में घोटाले की गूंज___
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM)। जनपद पंचायत गौरेला में इन दिनों भ्रष्टाचार की पटकथा लिखी जा रही है – वो भी ग्राम पंचायत के अधिकारों को कुचलकर। ग्राम पंचायत सार बहरा के प्रांगण में DMF मद से 19 लाख रुपये की लागत से पार्किंग निर्माण का कार्य बिना पंचायत की जानकारी, सहमति या प्रस्ताव के कराया जा रहा है। इससे पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पंचायत के पंचों ने साफ कहा है कि अगर इस पर तत्काल रोक नहीं लगी, तो सामूहिक इस्तीफा देकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को वे मजबूर होंगे।
पंचायत को अंधेरे में रखकर हुआ पूरा खेल___
गौरतलब है कि जिस जमीन पर यह कार्य हो रहा है, वह ग्राम पंचायत की है। यहां पहले कुछ निर्माण थे जिन्हें ठेकेदार संतोष तिवारी द्वारा तोड़ दिया गया और उसी स्थान पर पार्किंग बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि निर्माण की एजेंसी खुद ग्राम पंचायत ही है, लेकिन पंचायत के सरपंच, सचिव और पंचों को इस बारे में कोई सूचना तक नहीं दी गई। कार्य का कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ, न ही जनपद में फाइल दिखाई जा रही है!
खुला भ्रष्टाचार, खुले बयान____
ठेकेदार संतोष तिवारी का बयान और भी चौंकाने वाला है। उसने कहा – “मैं 15% कमीशन देकर ये काम लाया हूँ, इसलिए काम करूंगा।” यह सीधा कबूलनामा है कि जनपद पंचायत में DMF की राशि का बंदरबांट किस स्तर पर हो रहा है। जब इस पूरे कार्य की लागत 5 से 7 लाख रुपये से अधिक नहीं लगती, तो बाकी की 12-14 लाख रुपये किस जेब में जा रहे हैं?
DMF मद बना भ्रष्टाचार का अड्डा___
यह कोई अकेला मामला नहीं है। जनपद पंचायत गौरेला पहले से ही 15वें वित्त आयोग की राशि में बड़े घोटाले के चलते जांच के घेरे में है। अब DMF (District Mineral Foundation) जैसी महत्वपूर्ण योजना की राशि का इस तरह से दुरुपयोग साबित करता है कि जनपद पंचायत भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुकी है। DMF जैसी योजना, जिसका उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में सुधार लाना है, अब चंद लोगों के निजी लाभ का जरिया बन चुकी है।
शासन-प्रशासन की चुप्पी संदिग्ध____
23 सितंबर को सीईओ जनपद पंचायत गौरेला को लिखित शिकायत सौंपी गई थी। लेकिन न तो कोई कार्यवाही हुई, और न ही कार्य रोका गया। अब 26 सितंबर को कलेक्टर को दूसरा ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि कार्य की जांच और रोकथाम नहीं की गई, तो पंचगण सामूहिक इस्तीफा देकर जनपद कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना देंगे।
जिम्मेदारी तय करें, जांच कराएं____
ये मामला अब केवल एक पार्किंग निर्माण तक सीमित नहीं है। यह ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता, पंचायती राज व्यवस्था की गरिमा, और लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला है। अगर जिला प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो यह विवाद सिर्फ एक गांव का न रहकर जिलेव्यापी आक्रोश का रूप ले सकता है।अब वक्त है कि DMF मद में हो रहे इस खुले घोटाले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो। दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, और पंचायत को उसका हक वापस मिले – वरना यह आग अब पूरे जनपद को जला सकती है।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT









