GPM में अफसरशाही बेलगाम! जनप्रतिनिधियों को अपमानित कर चला रहे कार्यक्रम …पवन पैंकरा का फूटा गुस्सा — बोले: यह जिला है या अधिकारियों की जागीर?
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले में अफसरशाही इस कदर हावी हो चुकी है कि अब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को उनके ही क्षेत्र में खुलेआम अपमानित किया जा रहा है। जिले में शासकीय कार्यक्रमों को अधिकारी अपनी निजी जागीर समझकर चला रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा है। ताजा मामला ग्राम पंचायत धनौली (पेंड्रा रोड) का है, जहां प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के शुभारंभ समारोह ने प्रशासनिक कार्यशैली की पोल खोल कर रख दी।
गुरुवार 01 जनवरी 2026 को दोपहर 12 बजे आदिम जाति सेवा सहकारी समिति धनौली में आयोजित इस कार्यक्रम में मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी विशिष्ट अतिथि रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत CEO मुकेश रावटे ने की। जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैंकरा सहित कई जनपद और पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि मंच पर मौजूद थे। इसके बावजूद जिस क्षेत्र में यह पूरा कार्यक्रम आयोजित हुआ, उसी क्षेत्र क्रमांक 03 के निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य पवन पैंकरा का नाम आमंत्रण पत्र से पूरी तरह गायब था।
यह कोई साधारण भूल नहीं बल्कि प्रोटोकॉल की खुली अवहेलना और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि को अपमानित करने की साजिश मानी जा रही है। जैसे ही जिला पंचायत सदस्य पवन पैंकरा कार्यक्रम स्थल पहुंचे और आमंत्रण पत्र में अपना नाम न होने की जानकारी मिली, उन्होंने मौके पर ही कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले में लोकतंत्र नहीं बल्कि अधिकारी राज चल रहा है, जहां अफसर तय कर रहे हैं कि कौन सम्मान पाएगा और किसे अपमानित किया जाएगा।
विरोध बढ़ता देख स्थिति संभालने के लिए जिला पंचायत CEO मुकेश रावटे पवन पैंकरा से मान-मनौवल करते नजर आए, लेकिन तब तक मामला तूल पकड़ चुका था। आक्रोशित पवन पैंकरा ने इसे जनप्रतिनिधियों के सम्मान पर सीधा हमला बताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। मौके पर मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं और अन्य जनप्रतिनिधियों में भी भारी नाराजगी देखने को मिली।
पवन पैंकरा ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उन्होंने बताया कि ठीक एक दिन पहले उनके ही गृह ग्राम पंचायत देवर गांव स्थित मलानिया डेम में पर्यटन विभाग के तहत वॉटर बोर्ड का उद्घाटन किया गया, लेकिन उस कार्यक्रम में भी किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को आमंत्रित नहीं किया गया। न जिला सदस्य, न जनपद सदस्य, न सरपंच—पूरे कार्यक्रम को अधिकारियों ने अपने हिसाब से निपटा दिया।

उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि यदि जिले के सारे कार्यक्रम अधिकारियों को ही चलाने हैं, तो फिर चुनाव कराना और जनता द्वारा जनप्रतिनिधि चुनना केवल दिखावा रह गया है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को सामूहिक रूप से त्यागपत्र दे देना चाहिए और जिले को पूरी तरह अधिकारियों के भरोसे छोड़ देना चाहिए। पवन पैंकरा ने सवाल उठाया कि अधिकारी यहां प्रशासनिक व्यवस्था बनाने आए हैं या नेतागिरी करने।
पवन पैंकरा ने चेतावनी दी कि वे इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से करेंगे और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे मुख्य सचिव कार्यालय के सामने धरने पर बैठेंगे। जिले में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि गौरेला–पेंड्रा–मरवाही में अफसरशाही बेलगाम हो चुकी है और जनप्रतिनिधियों को जानबूझकर हाशिये पर धकेला जा रहा है।
अब सवाल सीधा और तीखा है—
GPM जिले में शासन व्यवस्था आखिर चला कौन रहा है? जनता के चुने हुए प्रतिनिधि या कुर्सी पर बैठे अधिकारी?
यह मामला अब केवल एक कार्यक्रम का नहीं रहा, बल्कि लोकतंत्र बनाम अफसरशाही की खुली टकराव की तस्वीर बन चुका है।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT







