कटघोरा में दूसरे सखी वन स्टॉप सेंटर की मंजूरी
कोरबा जिले में निजी और सार्वजनिक दोनों स्थानों पर हिंसा से पीड़ित एवं संकटग्रस्त महिलाओं को एकीकृत सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आकांक्षी जिला कोरबा में दूसरे सखी वन स्टॉप सेंटर के संचालन को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह सेंटर कटघोरा में भवन की उपलब्धता के अनुसार शासकीय अथवा किराए के भवन में संचालित किया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया लगभग पूर्ण कर ली गई है और शीघ्र ही संचालन प्रारंभ होने की संभावना है। इस सेंटर के शुरू होने से कटघोरा एवं आसपास के क्षेत्रों की हिंसा प्रभावित महिलाओं को चिकित्सा, कानूनी सहायता, पुलिस सहयोग, मनोवैज्ञानिक परामर्श एवं अस्थायी आश्रय जैसी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।
एकीकृत सहायता का प्रभावी माध्यम बनेगा सखी वन स्टॉप सेंटर
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य निजी एवं सार्वजनिक दोनों स्थानों पर हिंसा से पीड़ित महिलाओं को त्वरित, आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सेवाओं तक सहज पहुंच उपलब्ध कराना है। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को चिकित्सा उपचार, विधिक सहायता, पुलिस सहयोग, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अस्थायी आवास जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। राज्य के कई जिलों में यह व्यवस्था महिलाओं के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध हुई है, इसी कारण कुछ जिलों में अतिरिक्त सखी वन स्टॉप सेंटर की आवश्यकता महसूस की गई।
राज्य के आठ जिलों में अतिरिक्त सखी वन स्टॉप सेंटर को स्वीकृति
भारत शासन द्वारा आयोजित परियोजना क्रियान्वयन समिति की बैठकों में अतिरिक्त सखी वन स्टॉप सेंटर संचालन के प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिला दुर्ग अंतर्गत भिलाई तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में सात अन्य जिलों के लिए प्रस्ताव अनुमोदित किए गए। इन जिलों में बिलासपुर के सकरी, कोरबा के कटघोरा, रायगढ़ के धरमजयगढ़, कांकेर के भानुप्रतापपुर, राजनांदगांव के डोंगरगढ़, बलौदाबाजार के सिमगा एवं जांजगीर-चांपा के बलौदा शामिल हैं। इसके परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संबंधित जिलों में एक-एक अतिरिक्त सखी वन स्टॉप सेंटर संचालन की औपचारिक स्वीकृति जारी की गई है।
सेवा प्रदाताओं की भर्ती लगभग पूरी
प्रत्येक सखी वन स्टॉप सेंटर के सुचारु संचालन के लिए मानव संसाधन की व्यवस्था की जा रही है। इसके अंतर्गत केंद्र प्रशासक, साइको सोशल काउंसलर, केसवर्कर, पैरा लीगल कार्मिक अथवा वकील, पैरा मेडिकल कार्मिक, कार्यालय सहायक, बहुउद्देश्यीय कर्मचारी, रसोइया एवं सुरक्षा गार्ड जैसे पद स्वीकृत किए गए हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन 31 दिसंबर 2025 तक आमंत्रित किए गए थे। बताया जा रहा है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में विलंब होता है तो संरक्षण अधिकारी, पर्यवेक्षक एवं हब कर्मियों की अस्थायी सेवाएं लेकर तत्काल सखी वन स्टॉप सेंटर का संचालन शुरू किया जाएगा।
सखी निवास संचालन के लिए भवन की तलाश अब भी अधूरी
जहां एक ओर जिले में दूसरे सखी वन स्टॉप सेंटर को स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं दूसरी ओर भारत सरकार की एकीकृत महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत मिशन शक्ति अंतर्गत प्रस्तावित सखी निवास योजना का संचालन अब तक प्रारंभ नहीं हो सका है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा इसके लिए 37 हजार 500 रुपये किराए की सीमा में उपयुक्त भवन की तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक मानकों के अनुरूप भवन उपलब्ध नहीं हो पाया है। नवंबर माह में किराए के भवन हेतु आवेदन मंगाए गए थे, जिनमें कुछ प्रस्ताव प्राप्त हुए, पर वे आवश्यक सुविधाओं के अनुरूप नहीं पाए गए।
पूर्व पहल ठप, मिनीमाता कॉलेज भवन का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ा
सखी निवास संचालन के लिए 50 महिलाओं की क्षमता वाला सर्वसुविधायुक्त भवन आवश्यक है, जिसमें आवासीय कक्षों के साथ बिस्तर, कूलर, गीजर, वाटर कूलर, सीसीटीवी एवं कार्यालय फर्नीचर की व्यवस्था हो सके। पूर्व कलेक्टर अजीत वसंत के मार्गदर्शन में मिनीमाता कन्या महाविद्यालय के छात्रावास भवन के ऊपरी तल को उपलब्ध कराने की पहल की गई थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद इस दिशा में प्रयास आगे नहीं बढ़ सके।
करोड़ों का सखी निवास भवन होते हुए भी किराए की मजबूरी
जिले में बढ़ते औद्योगिकीकरण को देखते हुए कामकाजी महिलाओं के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिला खनिज संस्थान न्यास मद से वर्किंग वूमेन हॉस्टल निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। सुभाष चौक के समीप फल उद्यान के पीछे स्थित भूमि पर निर्मित इस भवन के लिए नौ करोड़ 11 लाख 12 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। इसके बावजूद साढ़े छह वर्ष बाद भी यह भवन अभिलेखों में पूर्ण नहीं दर्शाया जा सका। नगर निगम द्वारा वर्ष 2023 में इसे महिला एवं बाल विकास विभाग को हैंडओवर किया गया, लेकिन बाद में यह भवन मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया गया।
एक विभाग से छिनकर दूसरे विभाग को सौंपा गया भवन
कामकाजी महिलाओं के लिए निर्मित सखी निवास भवन को मेडिकल कॉलेज के अधीन किए जाने पर तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी ने आपत्ति भी दर्ज कराई थी, लेकिन तत्कालीन कलेक्टर के निर्देशों के आगे विभाग की आपत्ति प्रभावी नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप महिला एवं बाल विकास विभाग आज भी सखी निवास संचालन के लिए किराए के भवन तलाशने को मजबूर है। यदि यह भवन विभाग के पास रहता, तो करोड़ों रुपये के सर्वसुविधायुक्त परिसर में सखी निवास का संचालन संभव हो चुका होता।
विभाग का पक्ष
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग बसंत मिंज के अनुसार सखी निवास संचालन के लिए विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है। किराए के भवन के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे, लेकिन उपयुक्त भवन उपलब्ध नहीं हो पाए। मिनीमाता कन्या महाविद्यालय के छात्रावास भवन के ऊपरी तल को लेने की पहल की गई थी। भवन मिलते ही सखी निवास का संचालन तत्काल शुरू किया जाएगा।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT








