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After Mukesh Chandrakar, Who’s Next? Maikal Mafia Strikes with Deadly Attack on Sushant Gautam and Ritesh Gupta — Masterminds of the Attack”: Jayprakash Shivdasani, Lalan Tiwari, and Sunil Bali”

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मुकेश चंद्राकर के बाद अब किसकी बारी? मैकल में पत्रकारों को मारने की सुनियोजित कोशिश
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही (छत्तीसगढ़), 15 जनवरी 2026।
छत्तीसगढ़ में सच बोलना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। बस्तर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के बाद अब अमरकंटक–मैकल पर्वत श्रृंखला में अवैध खनन की पोल खोल रहे पत्रकार सुशांत गौतम और उनके सहयोगी रितेश गुप्ता पर सुनियोजित तरीके से हत्या की कोशिश की गई है। और इसके पीछे खनन माफिया के तीन बड़े चेहरे थे — जयप्रकाश शिवदासानी (जेठू), ललन तिवारी और सुनील बाली, जो वर्षों से क्षेत्र में अवैध खनन का नियंत्रण रखते हैं।
तीनों आरोपियों ने रची थी मौत की योजना
8 जनवरी की शाम, जब सुशांत और रितेश रिपोर्टिंग कर लौट रहे थे, तब जयप्रकाश शिवदासानी (जेठू) की कार ने उनके रास्ते को रोक दिया।साथ ही ललन तिवारी का हाइवा ट्रक साइड में खड़ा कर दिया गया और पीछे से सुनील बाली की फोर-व्हीलर ने घेराबंदी पूरी की।
तीनों आरोपियों ने मिलकर पत्रकारों को चारों ओर से घेर लिया और जानलेवा हमला किया। यह कोई सड़क दुर्घटना या झगड़ा नहीं था, बल्कि तीनों की सुनियोजित हत्या की साजिश थी।
लोहे की रॉड से हमला — आरोपियों की योजना साफ
तीनों आरोपियों में से किसी ने लोहे की रॉड से ड्राइवर साइड का कांच तोड़ दिया। टूटे कांच के टुकड़े सुशांत गौतम के चेहरे और माथे में जा घुसे।खू न बहने लगा। जान बचना सिर्फ पत्रकारों की सूझबूझ और किस्मत की वजह से संभव हुआ।अ गर सुशांत और रितेश उस समय गाड़ी से उतर जाते, तो आज यह खबर हमला नहीं बल्कि हत्या होती।
मोबाइल छीना गया — सबूत मिटाने की साजिश
तीनों आरोपियों — जयप्रकाश शिवदासानी, ललन तिवारी और सुनील बाली — ने रितेश गुप्ता का मोबाइल जबरन छीन लिया और बंद कर दिया। सुशांत के फोन के साथ भी हाथापाई की गई। यह स्पष्ट संकेत है कि तीनों का मकसद सिर्फ डराना नहीं, बल्कि सबूत मिटाकर सच को दबाना था।
FIR दर्ज — लेकिन आरोपियों पर कार्रवाई अभी बाकी
गौरेला थाना ने FIR नंबर 0014/2026 दर्ज की है।
तीनों आरोपियों पर हत्या की कोशिश, खतरनाक हथियार से हमला, आपराधिक धमकी और साजिश की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
लेकिन सवाल यह है — क्या जयप्रकाश शिवदासानी, ललन तिवारी और सुनील बाली पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी दबा दिया जाएगा?
समझौते का दबाव — आरोपियों की चाल
हमले के बाद कुछ प्रभावशाली लोग पत्रकारों पर समझौते का दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
लेकिन साफ सवाल है — अगर हत्या हो जाती, तो क्या तीनों आरोपियों की योजना पूरी करने के बाद लाश से भी समझौता किया जाता?
मुकेश चंद्राकर की चेतावनी और मैकल का हमला
बस्तर में मुकेश चंद्राकर की हत्या अब भी सबके सामने है।
अब मैकल में वही तीनों आरोपियों — जयप्रकाश शिवदासानी, ललन तिवारी और सुनील बाली — फिर वही पैटर्न दोहरा रहे हैं।
सच उजागर करो → माफिया को चोट पहुंचे → और फिर पत्रकार को निशाना बनाओ।

शांत जिले पर काला धब्बा
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही हमेशा शांत जिले के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन सुशांत और रितेश पर तीनों आरोपियों ने जो हमला किया, वह जिले के इतिहास पर काला धब्बा है।अब ज़रूरत है कि तीनों आरोपियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, ताकि सुशासन की सरकार में पत्रकार पर हाथ उठाने से पहले तीनों माफिया अपराधियों की रूह तक कांप जाए।
अब सवाल पूरे देश से है
मुकेश चंद्राकर के बाद अब किसकी बारी है?
सुशांत गौतम?
रितेश गुप्ता?
या फिर हर वो पत्रकार जो सच लिखता है?
यह हमला सिर्फ पत्रकारों पर नहीं,
यह लोकतंत्र और सुशासन पर हमला है!
Saket Verma
Author: Saket Verma

A professional journalist

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