मरवाही वन परिक्षेत्र में जंगलों की खुली नीलामी__
गौरेला पेंड्रा मरवाही: मरवाही वन परिक्षेत्र में वन संपदा की सुरक्षा को लेकर हालात अब बेहद गंभीर और चिंताजनक हो चुके हैं। जिस विभाग पर जंगलों की रक्षा की जिम्मेदारी है, उसी विभाग के वन रक्षकों से लेकर परिक्षेत्र अधिकारी तक पर जंगलों को बेचने, तस्करों से सांठगांठ करने और अवैध वसूली का संगठित नेटवर्क खड़ा करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह मामला अब केवल अनियमितता या लापरवाही का नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार की तस्वीर पेश कर रहा है।

वनरक्षक बने जंगलों के भक्षक
प्राप्त लिखित शिकायतों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार मरवाही वन परिक्षेत्र अंतर्गत राकेश पंकज एवं हरिहर डहरिया/उइके नामक वन रक्षकों पर कटरा, उषाढ़ और बेलझिरिया ग्रामों की वन भूमि में साल और सागौन जैसे राष्ट्रीयकृत व कीमती वृक्षों की रात के अंधेरे में अवैध कटाई कराने के गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि इन वन रक्षकों ने अपने पद और क्षेत्रीय पकड़ का दुरुपयोग करते हुए तस्करों को खुली छूट दी और जंगलों को अवैध रूप से काटकर बाहर भेजने का रास्ता बनाया।
कटे हुए वृक्षों को छत्तीसगढ़ से बाहर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश भेजकर तस्करों के माध्यम से करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार संचालित किए जाने की बात कही जा रही है। जिस साल की लकड़ी पर सरकार का एकाधिकार है और जिसकी बिना अनुमति कटाई सीधा अपराध है, वही लकड़ी कथित तौर पर वन रक्षकों की मौजूदगी और संरक्षण में जंगल से बाहर भेजी जा रही है।

शासकीय वाहन से रात्री वसूली का खेल
इस पूरे प्रकरण को और अधिक गंभीर बनाने वाला तथ्य यह है कि शिकायत में मरवाही वन परिक्षेत्र के शासकीय वाहन के दुरुपयोग का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इस सरकारी वाहन का उपयोग रात के समय वसूली के लिए किया जा रहा है। बरौर से मरवाही के बीच आने-जाने वाले व्यावसायिक वाहनों को रोककर अवैध रूप से पैसे वसूले जाते हैं, और यह वसूली किसी निजी गिरोह द्वारा नहीं बल्कि सरकारी गाड़ी की आड़ में की जाती है। जब सरकारी वाहन ही अपराध का माध्यम बन जाए, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस पूरे खेल को किस स्तर तक संरक्षण प्राप्त है।

ड्राइवर के खाते में पैसा, रेंजर की भूमिका पर सीधा सवाल
इस पूरे मामले में सबसे निर्णायक और चौंकाने वाला पहलू डिजिटल लेनदेन के सबूत हैं। सामने आए तीन स्क्रीनशॉट्स में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ₹1 लाख 44 हजार रुपये ऑनलाइन माध्यम से मरवाही वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) मुकेश कुमार साहू के ड्राइवर तेज सिंह रजक के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं।

यह तथ्य बेहद महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि तेज सिंह रजक रेंजर का निजी ड्राइवर है। वन विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े जानकारों का कहना है कि रेंजर का ड्राइवर किसी भी प्रकार का आर्थिक लेनदेन स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकता, वह पूरी तरह अपने अधिकारी के आदेश और नियंत्रण में कार्य करता है। ऐसे में ड्राइवर के खाते में हुआ यह लेनदेन अपने आप में इस बात की ओर इशारा करता है कि पैसों का पूरा लेनदेन रेंजर की जानकारी, सहमति और निर्देशन में ही किया और करवाया गया।

सूत्र यह भी बताते हैं कि ऑनलाइन रकम के अलावा लगभग ₹30 हजार रुपये नगद भी लिए गए, जिसमें रेंजर मौजूद थे ,वसूली नगद और डिजिटल दोनों माध्यमों से की गई यह वसूली इस बात का संकेत देती है कि पूरा सिस्टम सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था।
नया रेंजर, लेकिन हौसले बेहद बुलंद
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुकेश कुमार साहू को मरवाही वन परिक्षेत्र अधिकारी बने अभी लगभग दो महीने ही हुए हैं। इसके बावजूद इतने कम समय में ही उन पर वन तस्करों से लाखों रुपये की वसूली कराने और तस्करी को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नए रेंजर होने के बावजूद पैसों की भूख इतनी अधिक बताई जा रही है कि कर्तव्य और कानून दोनों को दरकिनार कर दिया गया। आरोप है कि एक ही ध्येय और एक ही उद्देश्य के साथ अवैध वसूली कर करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा करने की कोशिश की जा रही है।
अपराध प्रमाणित, फिर भी दबाव और चुप्पी
सूत्रों के हवाले से खबर ये भी है कि मरवाही वन परिक्षेत्र की संबंधित बीट में प्रमाणित अपराध पाए जाने के बावजूद दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय अधीनस्थ कर्मचारियों और शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाया गया। उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर चुप रहने के लिए मजबूर किए जाने की बात भी सामने आई है। यह स्थिति इस आशंका को और मजबूत करती है कि अवैध गतिविधियों को कहीं न कहीं उच्च स्तर का संरक्षण प्राप्त है।

विभाग का पक्ष और जनता की उम्मीद
इस पूरे मामले पर वन मंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद ने मीडिया से चर्चा में बताया है कि मामले की जांच के लिए एसडीओ को आदेश दिए गए हैं और जांच प्रतिवेदन के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, मरवाही के जंगल, वहां की जैव विविधता और स्थानीय नागरिक अब केवल जांच के आदेशों से संतुष्ट नहीं हैं। वे दोषियों की पहचान और ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।
अब सवाल जवाबदेही का
अब यह देखना बेहद अहम होगा कि वन विभाग के शीर्ष अधिकारी वन रक्षक से लेकर परिक्षेत्र अधिकारी तक की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। मरवाही के जंगल इस समय केवल खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी बनकर सामने खड़े हैं।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT








