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जीपीएम दौरे के दौरान मुख्यमंत्री का सख्त संदेश— “भ्रष्टाचारी को नहीं बख़्शा जाएगा”, मरवाही वन परिक्षेत्र मामले पर टिकी निगाहें

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मुख्यमंत्री के सख्त संदेश के बीच मरवाही वन परिक्षेत्र में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, DFO की निष्क्रियता पर भी उठे सवाल
मरवाही | MPG न्यूज़ : मरवाही वन परिक्षेत्र में सामने आए अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी के आरोप अब लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। वन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर संगठित रूप से वन संपदा की लूट, शासकीय संसाधनों के दुरुपयोग और अवैध वसूली के आरोप लगने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
कीमती वृक्षों की रात्रिकालीन कटाई का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार मरवाही वन परिक्षेत्र अंतर्गत कटरा, उषाढ़ और बेलझिरिया ग्रामों की वन भूमि में साल और सागौन जैसे राष्ट्रीयकृत एवं बहुमूल्य वृक्षों की रात्रि में अवैध कटाई कराए जाने के आरोप हैं। आरोप है कि कटे हुए वृक्षों को छत्तीसगढ़ से बाहर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश भेजकर बड़े पैमाने पर अवैध व्यापार किया गया।
शासकीय वाहन के दुरुपयोग से वसूली की शिकायत
मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि मरवाही वन परिक्षेत्र का शासकीय वाहन रात के समय बरौर–मरवाही मार्ग पर व्यावसायिक वाहनों से अवैध वसूली के लिए उपयोग किए जाने की शिकायत सामने आई है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है तो यह विभागीय नियमों के साथ-साथ आपराधिक कानूनों का भी उल्लंघन माना जाएगा।
डिजिटल लेन-देन से बढ़ा संगठित तंत्र का संदेह
उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के अनुसार लगभग 1 लाख 44 हजार रुपये की ऑनलाइन राशि शासकीय वाहन चालक के खाते में ट्रांसफर की गई है। इसके साथ ही नकद राशि की वसूली की जानकारी भी सामने आई है। जानकारों का कहना है कि इस तरह के लेन-देन बिना उच्च स्तर की जानकारी के संभव नहीं होते।
प्रथम दृष्टया निलंबन की जिम्मेदारी DFO की, लेकिन कार्रवाई शून्य
वन विभाग के नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के जानकारों के अनुसार, ऐसे गंभीर मामलों में प्रथम दृष्टया संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को निलंबित करना वनमंडलाधिकारी (DFO) की जिम्मेदारी होती है, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि, मामला उजागर होने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी कर्मचारी या अधिकारी को निलंबित नहीं किया गया है। इसे लेकर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर जांच को प्रभावित होने दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के बयान से बढ़ा प्रशासनिक दबाव

गौरतलब है कि कल गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही जिले के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि “भ्रष्टाचारी को किसी भी कीमत पर बख़्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो और कितना ही बड़ा क्यों न हो।”
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद अब मरवाही वन परिक्षेत्र से जुड़े इस प्रकरण पर कार्रवाई को लेकर अपेक्षाएं और बढ़ गई हैं।

तकनीकी जांच और FIR की मांग तेज

मामले में 23 जनवरी 2026 की रात्रि लगभग दो बजे संबंधित अधिकारियों की मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और शासकीय वाहन की जीपीएस लोकेशन की तकनीकी जांच कराए जाने की मांग की जा रही है। साथ ही वन संरक्षण अधिनियम, भारतीय वन अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर दर्ज कर आपराधिक जांच की मांग भी जोर पकड़ रही है।

अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री के सख्त संदेश के बाद क्या मरवाही वन परिक्षेत्र के इस गंभीर मामले में केवल निचले स्तर पर ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी कार्रवाई होती है या नहीं।

Ritesh Gupta
Author: Ritesh Gupta

Professional JournalisT

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