मरवाही के कटरा में जंगलों की अंधाधुंध कटाई: आदिवासी क्षेत्र में बड़े सरई (साल) वृक्ष धराशायी, वन विभाग की भूमिका पर सवाल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। मरवाही वनपरिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम कटरा के ढपनीपानी, गवरखोज प्लॉट क्रमांक 1086 में बड़े पैमाने पर सरई (साल) वृक्षों की कटाई का गंभीर मामला सामने आया है। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में जंगलों की बेतहाशा कटाई से वन संपदाओं की सुरक्षा एवं संवर्धन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मौके पर चार बड़े साल वृक्ष कटे मिले
ग्रामीणों के अनुसार 18 फरवरी 2026 को स्थल निरीक्षण के दौरान चार नग बड़े सरई (साल) के पेड़ कटे हुए पाए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में आए दिन हरे एवं फलदार वृक्षों की कटाई हो रही है, जिससे पर्यावरण संतुलन और वन्य जीवन पर खतरा बढ़ता जा रहा है।
अवैध लकड़ी तस्करों के हौसले बुलंद
ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार हो रही अवैध कटाई से लकड़ी तस्करों के हौसले बुलंद हैं। जब भी क्षेत्रवासी वन विभाग के आला अधिकारियों से शिकायत करते हैं, तो निष्पक्ष जांच के बजाय मामलों को टाल दिया जाता है। कुछ मामलों में पेड़ों को राजस्व विभाग की भूमि का बताकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है, जिससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं जागरूक नागरिकों ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

वन अधिकारियों की भूमिका पर संदेह
ग्रामीण इलाकों में अत्यधिक मात्रा में हो रही कटाई को देखते हुए वन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं से विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
मीडिया से किया इनकार
मामले को लेकर जब वन कर्मचारियों से सवाल किया गया, तो उन्होंने मीडिया के सामने जवाब देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे इस विषय में जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मरवाही वनपरिक्षेत्र कार्यालय में इस संबंध में जानकारी देने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं है।

निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा अवैध कटाई में शामिल लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र में व्यापक आंदोलन की चेतावनी भी दी जा रही है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और वन विभाग इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लग पाती है या नहीं।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT








