कोरबा। सत्ता और रसूख के आगे क्या कानून बौना हो चुका है? यह सुलगता हुआ सवाल इस वक्त कोरबा पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। कोरबा के जनपद उपाध्यक्ष और भाजपा नेता प्रकाश चन्द्र जाखड़ पर एक लाचार महिला ने घर में घुसकर आबरू पर हाथ डालने और पूरे परिवार को बेरहमी से पीटने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि 8 जुलाई को महिला थाने में लिखित शिकायत दिए जाने के 4 दिन बाद भी अब तक पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की है।
सूत्रों से मिली इस जानकारी ने अब पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि एक तरफ जहां महिला संबंधी गंभीर अपराधों में तत्काल कार्रवाई का नियम है, वहीं यहाँ जांच के बहाने पीड़िता को ‘मैनेज’ करने और मामले को ठंडे बस्ते में डालने की साजिश रची जा रही है।
ललिता कुमारी जजमेंट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां
कानून के मुताबिक, महिला संबंधी किसी भी गंभीर या संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) की शिकायत मिलने पर पुलिस को सर्वप्रथम तत्काल FIR दर्ज करनी होती है। सुप्रीम कोर्ट का भी स्पष्ट निर्देश है कि ऐसे मामलों में प्रारंभिक जांच के नाम पर एफआईआर में देरी नहीं की जा सकती। लेकिन कोरबा का यह मामला पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा दाग लगा रहा है। क्या भाजपा संगठन की ‘स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची’ में शामिल इस रसूखदार नेता को बचाने के लिए पुलिस जानबूझकर पैर पीछे खींच रही है?
क्या पीड़िता को ‘मैनेज’ करने का चल रहा है खेल?
स्थानीय हलकों और सूत्रों के हवाले से यह गंभीर आशंका जताई जा रही है कि एफआईआर दर्ज न करके पुलिस आरोपी नेता को समय दे रही है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में पहले ही साफ किया था कि आरोपी प्रकाश चन्द्र जाखड़ ने घटना के वक्त पैसे का लालच दिया था और बाद में प्रशासनिक पहुंच (एसडीएम, तहसीलदार) की धौंस दिखाते हुए पूरे परिवार को बर्बाद करने की धमकी दी थी। अब 4 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस का हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना, इस बात को हवा दे रहा है कि पर्दे के पीछे पीड़िता और उसके परिवार पर दबाव बनाने या उन्हें ‘मैनेज’ करने का खेल खेला जा रहा है।
रसोई में घुसकर की थी बदसलूकी, बचाने आए बुजुर्ग को भी पीटा
आपको बता दें कि यह पूरा मामला पसान क्षेत्र का है, जहां 3 जुलाई 2026 की शाम आरोपी प्रकाश चन्द्र जाखड़ शराब के नशे में धुत होकर एक 26 वर्षीय महिला के घर में जबरन घुस गया। महिला जब रसोई में खाना बना रही थी, तब आरोपी ने उससे छेड़छाड़ और जबरदस्ती की। जब महिला की चीख सुनकर उसका पति और बुजुर्ग ससुर बचाने दौड़े, तो दबंग नेता ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की और उन्हें जातिसूचक शब्द (‘) कहकर सरेआम अपमानित किया।
इसी साल लगा था सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का दाग, फिर भी पुलिस मेहरबान?
आरोपी प्रकाश चन्द्र जाखड़ का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी बेहद खौफनाक रहा है। इसी साल फरवरी 2026 में उन पर एक अन्य महिला की सामूहिक अस्मत लूटने और हत्या करने का संगीन आरोप लग चुका है, जिसकी लाश सुखरी तालाब में मिली थी। उस मामले में भी आरोपी द्वारा साक्ष्य (CCTV फुटेज) छुपाने की बात सामने आई थी।
इतने गंभीर और आपराधिक इतिहास वाले नेता पर एक और महिला द्वारा घर में घुसकर आबरू से खिलवाड़ करने का आरोप लगाने के बाद भी कोरबा पुलिस का यह ‘नरम रवैया’ कई बड़े सवाल खड़े करता है:
आखिर किसके दबाव में महिला थाना पुलिस ने 4 दिनों से एफआईआर को रोक कर रखा है?
क्या सत्ताधारी दल का नेता होने के कारण प्रकाश चन्द्र जाखड़ को कानून से ऊपर समझा जा रहा है?
अगर खौफजदा पीड़िता और उसके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
पीड़िता ने पहले ही अपनी और परिवार की जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है। अब देखना यह है कि मीडिया में मामला उछलने के बाद क्या कोरबा पुलिस नींद से जागती है या सत्ता के इस रसूख के आगे कानून ऐसे ही लाचार बना रहेगा।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT







