KORBA NEWS : एसडीओ संजय त्रिपाठी पर आरोप—फर्जी हस्ताक्षर से पंचनामा बनाकर वन प्रकरण नस्तीबद्ध, कटघोरा वनमंडल में स्टॉपडेम घोटाले की जांच पर सवाल
कोरबा/कटघोरा।
कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल में कैम्पा मद से बने स्टॉपडेम घोटाले का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पूर्व वर्षों में हुए कथित भ्रष्टाचार को दबाने और शिकायतों को नस्तीबद्ध करने के प्रयास अब उजागर होने लगे हैं। आरोप है कि जांच के दौरान प्रशिक्षु रेंजरों द्वारा फर्जी हस्ताक्षर से पंचनामा तैयार कर उसे आधार बनाकर पूरे मामले को निपटा दिया गया।
मामला कटघोरा वनमंडल के पसान वन परिक्षेत्र अंतर्गत गोलवानाला एवं कलेवानाला में निर्मित स्टॉपडेम से जुड़ा है। इनका निर्माण कैम्पा मद से कराया गया था। बताया जाता है कि पूर्व वन परिक्षेत्र अधिकारी धर्मेंद्र चौहान के कार्यकाल में गोलवानाला स्टॉपडेम का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका था। निर्माण के दौरान तत्कालीन वनमंडल अधिकारी प्रेमलता यादव द्वारा औचक निरीक्षण में कुछ कमियां जरूर पाई गई थीं, लेकिन उस समय उपवनमंडल अधिकारी श्री बंजारे एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग पोड़ी उपरोड़ा के एसडीओ द्वारा की गई संयुक्त जांच में कार्य को संतोषजनक बताया गया था और लगभग 29 लाख रुपये के कार्य की पुष्टि हुई थी।
इसके बावजूद आरोप है कि तत्कालीन रेंजर रामनिवास दहायत एवं एसडीओ संजय त्रिपाठी ने मिलकर षड्यंत्रपूर्वक स्टॉपडेम का प्राक्कलन रिवाइज कर दिया, जो कि कैम्पा अधिनियम का उल्लंघन बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मजदूरी और निर्माण की पूरी राशि रेंजर एवं अन्य अधिकारियों द्वारा अपने रिश्तेदारों, परिचितों और दोस्तों के खातों में डलवाकर राशि का गबन किया गया।
जांच में लीपापोती का आरोप
मामले की शिकायत के बाद विभागीय जांच कराई गई। निर्धारित जांच 27 नवंबर 2025 को की गई, लेकिन जांच के दौरान तैयार किए गए पंचनामा पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिन व्यक्तियों के नाम पंचनामा में गवाह के रूप में दर्शाए गए हैं, उन्होंने अपने हस्ताक्षर को फर्जी बताते हुए कहा है कि न तो उन्हें पंचनामा पढ़कर सुनाया गया और न ही उसकी सामग्री की जानकारी दी गई।
सूत्रों का कहना है कि बिना सहमति और जानकारी के हस्ताक्षर दर्शाकर पंचनामा तैयार किया गया, जिससे पूरी जांच प्रक्रिया दूषित मानी जा रही है।
दूषित पंचनामा के आधार पर शिकायत नस्तीबद्ध
उपवनमंडलाधिकारी पाली द्वारा प्रेषित जांच प्रतिवेदन में यह उल्लेख किया गया कि गोलवानाला एवं कलेवानाला स्टॉपडेम निर्माण कार्य प्राक्कलन के अनुरूप पूर्ण पाए गए हैं तथा स्थानीय ग्रामीणों से पूछताछ में मजदूरी भुगतान शेष नहीं होने की बात सामने आई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर वनमंडल अधिकारी द्वारा शिकायत को नस्तीबद्ध करने की अनुशंसा कर दी गई।
हालांकि, अब जब पंचनामा के फर्जी होने के आरोप सामने आए हैं, तो पूरी जांच और शिकायत नस्तीबद्ध किए जाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामले के उजागर होने के बाद संबंधित अधिकारी इसे मैनेज करने की कोशिशों में जुटे बताए जा रहे हैं।
Author: Saket Verma
A professional journalist







