“गालीबाज” इंजीनियर की फिर से कोरबा में वापसी! 6 महीने में ही बहाल, क्या VIP ट्रीटमेंट मिल रहा है माधुरी पटेल को?
कोरबा। छत्तीसगढ़ के बिजली विभाग में एक बार फिर न्याय और अनुशासन को धत्ता बताने वाला फैसला सामने आया है। “गालीबाज” महिला सहायक अभियंता माधुरी पटेल, जिनका आदिवासी कर्मचारी के साथ गाली-गलौच भरा ऑडियो कुछ महीने पहले पूरे राज्य में वायरल हुआ था — अब उन्हें फिर से कोरबा जिले में बहाल कर दिया गया है!
क्या VIP अधिकारियों के लिए नियम-कायदे अलग होते हैं?
सवाल उठ रहे हैं — क्या छत्तीसगढ़ में अब विभागीय नियमों की कोई अहमियत नहीं बची? क्या महिला अधिकारी होने या “ऊपर” तक पहुंच होने का फायदा उठाया जा रहा है? आखिर कैसे एक विवादित, अशिष्ट और अनुशासनहीन अधिकारी को महज 6 महीने में ही उसी जिले में वापस पोस्ट कर दिया गया, जहां से उन्हें शर्मनाक ऑडियो के बाद हटाया गया था?
ऑडियो में आदिवासी कर्मचारी को दी गंदी गालियां__
मामला किसी साधारण बहस का नहीं है — वायरल ऑडियो में सहायक अभियंता माधुरी पटेल 64 वर्षीय आदिवासी लाइन इंस्पेक्टर चक्रधर कंवर को गंदी, अश्लील गालियां देते हुए सुनी गई थीं। चक्रधर कंवर न सिर्फ वरिष्ठ कर्मचारी हैं, बल्कि आदिवासी समाज से आते हैं। उनके साथ हुए इस व्यवहार से आदिवासी समाज, कर्मचारी संगठन और आम नागरिकों में आक्रोश था।
कार्रवाई का दिखावा और वापसी का इनाम!
उस समय कार्यपालन निदेशक आलोक कुमार अम्बस्थ ने त्वरित कार्रवाई कर उन्हें पेंड्रारोड अटैच कर दिया था। लेकिन अब वही अधिकारी फिर से कोरबा जिले के पाली में पोस्ट कर दी गई हैं, मानो कुछ हुआ ही नहीं! क्या यह कार्रवाई सिर्फ जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए की गई थी? या फिर पीछे से कुछ “सेटिंग” पहले से तय थी?
कर्मचारी बोले – “यह सीधा-सीधा अन्याय है”
विभागीय कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका कहना है –
अगर कोई सामान्य कर्मचारी ऐसा करता तो उसे निलंबित कर दिया जाता, लेकिन यहां तो उल्टा इनाम मिल रहा है। ये पोस्टिंग नहीं, ये एक सिग्नल है कि गाली दो, धमकाओ… और फिर बहाल हो जाओ।”
सरकार और विभाग क्या संदेश देना चाहते हैं?
यह मामला केवल एक कर्मचारी का नहीं है, यह पूरे सिस्टम की साख पर सवाल है। यदि विभाग इस तरह की गैर-जिम्मेदार और अभद्र अधिकारियों को दोबारा ज़िम्मेदारी देता है, तो इसका असर सीधा कर्मचारियों के मनोबल और जनविश्वास पर पड़ता है।
अब क्या होगा आगे?
अब देखना यह है कि क्या छत्तीसगढ़ सरकार और बिजली विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले में सख्ती से कोई पुनः निर्णय लेंगे, या फिर इस गालीबाज अफसर को बचाने का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT









