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बकसाही में मानवीय संवेदनाओं का गला घोंटा : चाचा की मिट्टी में शामिल होने नही दिया, मां को भी किया अपमानित, समाज ने श्रोते परिवार का हुक्का- पानी बंद कर जीना किया दूभर, पीड़ित ने थाने में लगाई गुहार

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0 गांव से भगाने की तैयारी, पीड़ित परिवार दहशत में.
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कोरबा/पाली:-एक तरफ हम वसुधैव कुटुम्बकम की बात करते हैं, दूसरी तरफ समाज द्वारा शोक के समय ही अपनों को पराया कर दिया जाता है। कुछ ऐसे ही मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला एक मामला ग्राम बकसाही से सामने आया है। यहां भरतलाल श्रोते, पिता स्व. आशाराम श्रोते और उनके परिवार को गांव के 12 लोगों द्वारा सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया गया है। पीड़ित ने 27 जून 26 को थाना में लिखित आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। शिकायत की प्रति कलेक्टर, एसपी कोरबा और मीडिया को भी भेजी गई है।
आवेदन के अनुसार गत 19 दिसंबर 2025 को भरतलाल के चाचा रामकृष्ण श्रोते का निधन हो गया था। अंतिम संस्कार में शामिल हहोने के लिए भरतलाल की गैर मौजूदगी में उनकी मां बेलसिया बाई गई थी। लेकिन समाज पर आरोप है कि उनकी मां को मिट्टी/ अंतिम संस्कार में शामिल होने से मना कर दिया गया। दशगात्र में भी परिवार को नही बुलाया गया। जिससे उन्होंने अलग से दशगात्र किया। शिकायत में भरतलाल ने कहा है कि उनके और उनके परिवार को शादी, जन्मदिन, मृत्यु सहित अन्य सभी सामाजिक कार्यक्रमों में आने- जाने से पूर्णतः मना कर दिया गया है। जिसे गांव की भाषा मे हुक्का- पानी बंद करना कहते है। पीड़ित का कहना है कि इस कारण उनका जीना अत्यंत दुर्लभ और दूभर हो गया है। सामाजिक प्रतिष्ठा पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और परिवार भयभीत है कि आगे उनके साथ क्या अनहोनी होगी। यहां तक कि विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि विपक्षीगण उन्हें गांव से भगाने की तैयारी कर रहे हैं। सामाजिक रूप से बहिष्कृत किये जाने को लेकर भरतलाल ने अपने समाज बकसाही और आसपास के समाज की बैठक बुलाई थी। लेकिन विपक्षियों के प्रभाव के कारण कोई भी बैठक में एकत्रित नही हुआ। इसके पहले भरतलाल ने समाज के सचिव और प्रमंडल बकसाही को भी आवेदन दिया था। शिकायत में 12 लोगों के नाम दिए गए हैं, जिन्होंने मिलकर सामाजिक बहिष्कार किया है। गौरतलब है कि सामाजिक बहिष्कार करना एससी- एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध है, इसके बावजूद 21वीं सदी में भी इस तरह की घटनाएं सामने आना चिंता का विषय है। ग्रामीणों का भी कहना है कि शोक के समय में भी भेदभाव करना अमानवीय है, यह घटना समाज मे फैली कटुता व कुरीति की जीती- जागती मिशाल है। बहरहाल भरतलाल ने थाना प्रभारी से सहानुभूतिपूर्वक विचार कर दोषियों के खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई करते हुए न्याय दिलाने मांग की है।
Ritesh Gupta
Author: Ritesh Gupta

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