ग्रीन क्रेडिट योजना चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट___सिंचाई की व्यवस्था के बिना किए गए रोपण, पौधे सूखने की कगार पर
जीपीएम (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) जिले के मरवाही वन मंडल के वन परिक्षेत्र खोडरी सहित अन्य क्षेत्रों में ग्रीन क्रेडिट योजना के अंतर्गत पिछले वर्ष जून-जुलाई में किए गए प्लांटेशन अब सूखे का शिकार हो रहे हैं। रोपित पौधों के लिए न तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था है और न ही किसी प्रकार का वैकल्पिक सिंचाई स्रोत उपलब्ध है।
जानकारी के अनुसार तत्कालीन डीएफओ मरवाही रौनक गोयल ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ मिलकर योजना के तहत बजट प्राप्त करने के उद्देश्य से प्लांटेशन के लिए ऐसे स्थानों का चयन किया, जो वास्तव में रोपण के लिए उपयुक्त नहीं थे। पूरे वन मंडल के चारों परिक्षेत्रों में पथरीले और सघन वन क्षेत्रों को प्लांटेशन योग्य बताकर “सिंचित रोपण” दिखाया गया, जबकि मौके पर न बिजली की व्यवस्था है और न ही पानी का कोई स्थायी स्रोत।
स्थिति यह है कि लगभग 90 प्रतिशत प्लांटेशन स्थलों पर सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है। कई स्थानों पर केवल बोर खनन कराकर मशीनों की खरीद दिखाई गई, जिससे भारी कमीशनखोरी होने की आशंका जताई जा रही है। परिणामस्वरूप जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग हुआ है।
वर्तमान में रोपित पौधों में से लगभग 70 प्रतिशत पौधे सूखने की कगार पर हैं। आरोप है कि जिम्मेदारी से बचने के लिए संबंधित अधिकारी केवल सामने के हिस्सों में बड़े पौधे लगाकर और सिंचाई करते हुए दिखावा कर रहे हैं, जबकि पीछे के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में कोई सिंचाई नहीं हो रही है।
स्थानीय जनता और वन प्रेमियों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा उनसे सरकारी राशि की वसूली की जाए, ताकि जनहित और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से चल रही योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो सके।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT








