मुंगेली, 26 मार्च 2026 — भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में एसीबी बिलासपुर ने डिप्टी रेंजर मनीष श्रीवास्तव को ₹50,000 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस पूरे खेल में रेंजर पल्लव नायक की भूमिका भी सामने आई है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।
रिश्वत का पूरा खेल उजागर
लोरमी निवासी अजीत कुमार वैष्णव की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई। आरोप है कि केस को हल्का करने, चालान जल्द पेश करने और जब्त वाहन छोड़ने के बदले मनीष श्रीवास्तव ने ₹70 हजार की मांग की थी। इतना ही नहीं, पूरे मामले को “सेटल” करने के लिए 4–5 लाख रुपए खर्च होने की बात भी कही गई थी।
ट्रैप में फंसा “साहब”
एसीबी ने योजना बनाकर कोटा के “मित्र मिलन रेस्टोरेंट” में ट्रैप बिछाया। जैसे ही मनीष श्रीवास्तव ने ₹50,000 की पहली किस्त ली, टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। मौके पर मौजूद रेंजर पल्लव नायक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई—जिससे साफ है कि यह अकेले का खेल नहीं था।
अब कानून का शिकंजा
दोनों आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। अब विभागीय ताकत नहीं, बल्कि कानून का सामना करना होगा।
पुराना इतिहास, वही हरकत
मनीष श्रीवास्तव पहले भी मरवाही वन मंडल में ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत लापरवाही के कारण निलंबित हो चुके हैं।लेकिन निलंबन के बाद भी उनकी कार्यशैली नहीं बदली—और आखिरकार घूस लेते हुए पकड़े गए।
साफ संदेश:
“घूसखोरी की आदत छूटती नहीं… और कानून से बचना मुमकिन नहीं।”
एसीबी का लगातार प्रहार
यह पिछले दो वर्षों में एसीबी बिलासपुर की 45वीं ट्रैप कार्रवाई है। लगातार हो रही कार्रवाई से भ्रष्ट अफसरों में डर साफ दिखाई दे रहा है।
जनता से अपील
एसीबी ने कहा है—अगर कोई भी अधिकारी रिश्वत मांगे, तो तुरंत शिकायत करें।
अब सिस्टम बदल रहा है… और घूसखोर बेनकाब हो रहे हैं।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT








