कोटमी चौकी प्रभारी अजय वारे का मामला पहुंचा मानवाधिकार आयोग छत्तीसगढ़
पेंड्रा | जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (छत्तीसगढ़) कोटमी पुलिस चौकी के प्रभारी अजय वारे से जुड़ा विवाद अब राज्य स्तर तक पहुंच गया है। स्थानीय निवासी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मामला अब छत्तीसगढ़ राज्य मानवाधिकार आयोग में दर्ज कराया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 27 नवंबर 2025 को वे एक आवेदन प्रस्तुत करने कोटमी चौकी पहुंचे थे, जहां उनका आवेदन लेने से इनकार किया गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता के अनुसार घटना के दिन चौकी में उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया और कथित रूप से उनके साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया। उनका कहना है कि यह व्यवहार न केवल अनुचित था बल्कि एक आम नागरिक के अधिकारों के विपरीत भी है। घटना के बाद वे मानसिक रूप से आहत हुए और उन्होंने विधिक प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया।
प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए कदम
घटना के बाद शिकायतकर्ता ने पहले राज्य के जनशिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को लिखित आवेदन सौंपा गया। जब वहां से भी स्पष्ट कार्रवाई या जांच संबंधी जानकारी नहीं मिली, तो उन्होंने सीधे छत्तीसगढ़ पुलिस के पुलिस महानिदेशक (DGP) को मामले से अवगत कराया। शिकायतकर्ता का कहना है कि अभी तक उन्हें किसी ठोस कार्रवाई की आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
मानवाधिकार आयोग की शरण
प्रशासनिक स्तर पर संतोषजनक कार्रवाई न होने के बाद शिकायतकर्ता ने मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है। साथ ही घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और जांच की निष्पक्षता बनाए रखने हेतु संबंधित चौकी प्रभारी को पद से हटाने का आग्रह भी किया गया है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज
मामले के सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नागरिकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि शिकायत दर्ज होने के बाद भी समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती, तो आमजन को न्याय कैसे मिलेगा। हालांकि, इस पूरे प्रकरण में अब तक संबंधित पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
विभागीय प्रतिक्रिया का इंतजार
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य मानवाधिकार आयोग इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और क्या विभागीय स्तर पर कोई प्रशासनिक कदम उठाया जाता है। विभाग की प्रतिक्रिया आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
Author: Ritesh Gupta
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