गौरेला-पेंड्रा-मरवाही टेंडर विवाद में ईई घिरे: “कारण बताओ नोटिस” के बाद बढ़ा दबाव, जांच के घेरे में कार्यपालन अभियंता
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 3.01 करोड़ रुपये के जिला पंचायत भवन निर्माण कार्य से जुड़ा टेंडर विवाद अब सीधे कार्यपालन अभियंता (EE), ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, मरवाही पर केंद्रित हो गया है। मंडल बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता कार्यालय द्वारा जारी “कारण बताओ सूचना पत्र” के बाद जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो गई है।
आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही होगी।
नोटिस में क्या सवाल उठे?
सूचना पत्र में संकेत है कि:
• तकनीकी दस्तावेजों का समुचित परीक्षण नहीं किया गया,
• निविदा निरस्तीकरण की जानकारी के बावजूद वित्तीय प्रस्ताव खोला गया,
• निविदा शर्तों और सेवा आचरण नियमों के संभावित उल्लंघन की स्थिति बनी।
यदि ये बिंदु सही पाए जाते हैं, तो यह केवल प्रक्रिया की चूक नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक जवाबदेही का मामला बन सकता है।
ईई की भूमिका पर सीधे सवाल
• जब दो फर्मों के अनुभव/पूर्णता प्रमाण पत्रों पर विवाद था, तो तकनीकी जांच में आपत्ति क्यों नहीं उठी?
• संदिग्ध दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि क्यों नहीं कराई गई?
• निरस्तीकरण के बाद वित्तीय बोली खोलना किस आधार पर उचित माना गया?
इन प्रश्नों का जवाब सीधे-सीधे कार्यपालन अभियंता के दायरे में आता है, क्योंकि निविदा प्रक्रिया की निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करना उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारी है।
मीडिया से दूरी, संदेह गहरा
विवाद के बीच ईई का मीडिया को तत्काल स्पष्ट बयान न देना भी चर्चा में है। पारदर्शिता की मांग के बीच चुप्पी और समय-टालू रवैया संदेह को बढ़ा रहा है। हालांकि अधिकारी का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
आगे क्या?
ईई से 3 दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है।
अब नजर इस पर है कि—
• क्या जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होगी?
• क्या जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होगी?
टेंडर की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही दांव पर है। जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि यह महज लापरवाही थी या गंभीर अनियमितता।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT








