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“क्या मरवाही विकासखंड में कोई योग्य नहीं…? BRC पद पर बाहरी नियुक्ति से उठे सवाल, नियमों को सरेआम उड़ाई धज्जियां?”

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“क्या मरवाही में कोई नहीं…? शिक्षा विभाग की BRC नियुक्ति पर उठे सवाल, नियमों की उड़ाई धज्जियां!”
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) में शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला मरवाही विकासखंड में BRC (ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर) की नियुक्ति से जुड़ा है, जिसे लेकर विभागीय नियमों की अनदेखी और अफसरों की मनमानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मरवाही विकासखंड के BRC पद पर पेंड्रा विकासखंड के प्रधान पाठक अजय कुमार राय, जो शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भर्रापारा पेंड्रा में पदस्थ हैं, की नियुक्ति की गई है। यह नियुक्ति न केवल नियमों के विपरीत है बल्कि इससे स्थानीय पात्र शिक्षकों की अनदेखी भी उजागर होती है। क्या है नियम, और कैसे हुआ उल्लंघन…?
👉 नियमानुसार, BRC पद पर नियुक्ति के लिए केवल संबंधित विकासखंड में पदस्थ मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक ही पात्र माने जाते हैं।
👉 यदि विकासखंड में कोई पात्र प्रधान पाठक उपलब्ध नहीं है, तब जिला कलेक्टर की विशेष अनुमति से ही अन्य विकासखंड से नियुक्ति संभव है।
👉 चयन प्रक्रिया डीईओ और डीपीसी की संयुक्त समिति के माध्यम से की जाती है, जिसे कलेक्टर की स्वीकृति के बाद ही आदेशित किया जाता है।
इस प्रक्रिया में स्थानीय प्राथमिकता सुनिश्चित की जाती है। इस प्रकरण में न तो किसी विशेष अनुमति की जानकारी सामने आई है और न ही स्थानीय पात्र शिक्षकों की अनुपलब्धता प्रमाणित हुई है, बावजूद इसके बाहरी ब्लॉक के शिक्षक को बीआरसी बना दिया गया।
जांच की मांग क्यों उठ रही है…?
✔️ स्थानीय पात्र प्रधान पाठकों की पूरी तरह अनदेखी।
✔️ बिना समिति निर्णय और पारदर्शिता के नियुक्ति आदेश।
✔️ मनचाही पोस्टिंग देकर विभाग की निष्पक्षता पर सवाल।
✔️ लेनदेन और अंदरूनी सांठगांठ की अटकलें तेज।
–क्या बोले अधिकारी…?
जब इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया और केवल इतना कहा कि मामले की जांच कर रिपोर्ट दी जाएगी। वहीं विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह नियुक्ति नियमों के स्पष्ट उल्लंघन का मामला है।
अब आगे क्या…?
यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो यह नियुक्ति तत्काल निरस्त की जा सकती है। साथ ही नियुक्ति आदेश जारी करने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही भी तय मानी जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है — “क्या मरवाही में कोई योग्य शिक्षक नहीं?” और यदि हैं, तो फिर उन्हें नजरअंदाज कर नियमों को तोड़ने की आखिर जरूरत क्यों पड़ी
Ritesh Gupta
Author: Ritesh Gupta

Professional JournalisT

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