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शिक्षा विभाग में घोटाला: नियमों को रौंदकर मिली अनुकंपा नियुक्ति, परिजन पहले से थे सरकारी नौकरी में

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मरवाही शिक्षा विभाग में फर्जी अनुकंपा नियुक्ति का खुलासा — मृत शिक्षक के दो पुत्रों में एक पहले से शासकीय सेवक, फिर भी दूसरे को मिल गई नौकरी!
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। मरवाही शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। मृत शिक्षक स्व. रामस्वरूप गुप्ता के परिवार में पहले से एक पुत्र शासकीय शिक्षक पद पर कार्यरत था, बावजूद इसके वर्ष 2008 में उनके दूसरे पुत्र राकेश कुमार गुप्ता को नियमों को ताक पर रखकर अनुकंपा नियुक्ति दे दी गई। यह नियुक्ति न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगाती है।
शिकायत में खुलासा किया गया है कि स्व. रामस्वरूप गुप्ता के बड़े पुत्र कुंवारे लाल गुप्ता पहले से शिक्षक थे, जो अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता को स्वतः खारिज कर देता है। इसके बावजूद विकासखंड शिक्षा अधिकारी, मरवाही ने वर्ष 2008 में छोटे पुत्र राकेश गुप्ता को सहायक ग्रेड-03 के पद पर नियुक्त कर दिया।
वर्तमान में राकेश गुप्ता सहायक ग्रेड-02 के पद पर कार्यरत हैं, यानी एक फर्जी नियुक्ति के सहारे वे आज तक वेतन उठा रहे हैं और शासन की आँखों में धूल झोंक रहे हैं। यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत का घिनौना उदाहरण है।
क्या कहता है नियम?
छत्तीसगढ़ शासन का स्पष्ट आदेश (क्रमांक 7-4/2002/1-3, दिनांक 10.06.2003) है कि यदि मृत शासकीय कर्मचारी के परिवार में कोई सदस्य पहले से शासकीय सेवा में कार्यरत हो, तो अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता। इसी आदेश के आधार पर जिले में कई नियुक्तियाँ निरस्त की जा चुकी हैं।
तो फिर राकेश गुप्ता को कैसे मिल गई नौकरी? कौन हैं इसके पीछे के अधिकारी?
पूर्व मामलों में हुई कार्यवाही, पर इस पर क्यों चुप्पी?
दुर्गेश बैगा और ललित कुमार मरावी जैसे मामलों में पहले ही शासन ने नियुक्तियाँ रद्द कर दी थीं क्योंकि उनके परिवार में पहले से सदस्य शासकीय सेवा में थे। लेकिन राकेश गुप्ता के मामले में अब तक न तो कोई जांच हुई, न ही कोई कार्रवाई। क्या प्रशासन किसी खास दबाव में है? या मामला पैसे का खेल है?
मांगी गई उच्चस्तरीय जांच
शिकायतकर्ता ने लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर में लिखित शिकायत कर पूरे मामले की जांच की मांग की है। मांग की गई है कि राकेश गुप्ता की नियुक्ति की तत्काल जांच कर इसे निरस्त किया जाए और दोषियों पर कड़ी विभागीय/ आपराधिक कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल ये है कि— क्या शिक्षा विभाग ऐसे फर्जीवाड़ों पर चुप्पी साधे रहेगा या फिर न्याय और पारदर्शिता की मिसाल पेश करेगा? मरवाही के जागरूक नागरिक और शिक्षक संघ इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।यह एक नौकरी नहीं, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों की हत्या है।
Ritesh Gupta
Author: Ritesh Gupta

Professional JournalisT

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