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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला : 3.01 करोड़ के निर्माण टेंडर में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाने की शिकायत, कड़ी कार्यवाही की मांग

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला : 3.01 करोड़ के निर्माण टेंडर में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाने की शिकायत, जांच की मांग
Gaurela pendra मरवाही: जिला पंचायत निर्माण कार्य से जुड़े 3 करोड़ 1 लाख 32 हजार रुपये की लागत वाले टेंडर में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में ठेकेदार फर्म श्रीजी कंस्ट्रक्शन द्वारा लिखित शिकायत प्रस्तुत कर जांच और संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।
ऑनलाइन निविदा क्रमांक 183774 पर उठे सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला पंचायत भवन निर्माण कार्य (ऑनलाइन निविदा क्रमांक–183774) के तहत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में प्रस्तावित कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया आयोजित की गई थी। शिकायतकर्ता फर्म का दावा है कि उसने भी उक्त निविदा में भाग लिया था और अपने अनुभव के रूप में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन, शिवरीनारायण के निर्माण से संबंधित पूर्णता प्रमाण पत्र संलग्न किया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित अन्य ठेकेदार द्वारा उसी कार्य से जुड़े अनुभव एवं पूर्णता प्रमाण पत्र की कूट रचना (फर्जी दस्तावेज) कर टेंडर में प्रस्तुत किया गया।
CGMSC से आवंटित कार्य का हवाला
पत्र में उल्लेख है कि उक्त निर्माण कार्य पूर्व में CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन) के माध्यम से संबंधित फर्म को आवंटित किया गया था। इसकी पुष्टि विभागीय अभिलेखों से की जा सकती है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दूसरे ठेकेदार ने फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के आधार पर अनुभव दर्शाया, जबकि जावक क्रमांक तक दर्ज नहीं है।
फर्जी दस्तावेज के आधार पर टेंडर स्वीकृति का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र के आधार पर निविदा में पात्रता हासिल की गई। ऐसे में संबंधित टेंडर को निरस्त कर संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई तथा पंजीयन निरस्त करने की मांग की गई है।
उच्च अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि
शिकायत पत्र की प्रतिलिपि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री, मुख्य अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा रायपुर, अधीक्षण अभियंता बिलासपुर, कलेक्टर जीपीएम तथा पुलिस अधीक्षक जीपीएम को भी प्रेषित की गई है।
जांच के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट
मामला अब विभागीय जांच के दायरे में है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता मानी जाएगी। फिलहाल संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Ritesh Gupta
Author: Ritesh Gupta

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