गोपाल कृष्ण अग्रवाल पर फिर नोटिस: 7 दिन की मोहलत खत्म, अब भी कार्रवाई पर सन्नाटा
पेण्ड्रा में अवैध प्लॉटिंग का खेल, क्या फिर ठंडे बस्ते में जाएगा मामला?
पेण्ड्रा, 3 मार्च 2026। जिले में अवैध प्लॉटिंग के कथित खेल को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा ने 24 फरवरी 2026 को गोपाल कृष्ण अग्रवाल, पेण्ड्रारोड के नाम कारण बताओ नोटिस जारी किया था। आरोप है कि वार्ड क्रमांक 15, पेण्ड्रा–गौरेला मुख्य मार्ग पर बिना सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के कॉलोनी विकास और प्लॉटिंग का कार्य किया जा रहा था, जो नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 (क) एवं 339 (ख) का उल्लंघन है।
नोटिस में स्पष्ट निर्देश था कि तत्काल प्रभाव से निर्माण और प्लॉटिंग कार्य बंद किया जाए तथा 7 दिवस के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कॉलोनाइजर लाइसेंस निरस्त कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
7 दिन पूरे, लेकिन आगे क्या?
आज 3 मार्च है। यानी नोटिस की 7 दिन की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने जवाब दिया? यदि दिया तो क्या वह संतोषजनक पाया गया? यदि जवाब नहीं दिया गया तो क्या लाइसेंस निरस्तीकरण या दंडात्मक कार्रवाई शुरू की गई?नगर पालिका की ओर से अब तक इस पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है। यही चुप्पी पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला रही है।
पहले भी कट चुका है नोटिस, फिर दब गया मामला
जानकारी के अनुसार, कुछ महीने पूर्व भी गोपाल अग्रवाल को कथित अवैध प्लॉटिंग के संबंध में नोटिस जारी किया गया था। लेकिन उस कार्रवाई का क्या हुआ, यह आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया। स्थानीय स्तर पर चर्चा रही कि मामला आगे बढ़ने के बजाय फाइलों में दबकर रह गया।
यदि पहले भी नोटिस जारी हुआ था और कथित अनियमितताएं जारी रहीं, तो क्या उस समय सख्ती नहीं बरती गई? क्या नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही थी या उदासीनता? या फिर मामला किसी और वजह से आगे नहीं बढ़ पाया?

जिला प्रशासन के नाक के नीचे खेल?
वार्ड क्रमांक 15 का क्षेत्र मुख्य मार्ग पर स्थित है। ऐसे प्रमुख इलाके में यदि बिना अनुमति प्लॉटिंग और कॉलोनी विकास की गतिविधियां चलती रहीं, तो यह निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या यह सब अचानक हुआ या लंबे समय से जारी था? यदि शिकायतें मिल रही थीं तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब होगा एक्शन या फिर ‘सेटिंग’?
नगर पालिका के नोटिस ने निश्चित रूप से कार्रवाई की औपचारिक शुरुआत की है। लेकिन जिले में चर्चा इस बात की है कि क्या इस बार वास्तव में सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर यह मामला भी कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा।
जनता की निगाहें अब नगर पालिका के सीएमओ और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। 7 दिन की मोहलत खत्म हो चुकी है। अब प्रशासन को स्पष्ट करना होगा—
• जवाब आया या नहीं?
• जांच हुई या नहीं?
• लाइसेंस निरस्तीकरण या अन्य दंडात्मक प्रक्रिया शुरू हुई या नहीं?
यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं रह गया है, बल्कि पूरे जिले में अवैध प्लॉटिंग पर प्रशासन की इच्छाशक्ति और पारदर्शिता की कसौटी बन चुका है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कानून का डंडा चलेगा या फिर फाइलों की धूल इस मुद्दे को ढंक देगी।
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT









