नियमों की बलि या ‘सेटिंग’ का खेल? प्रधान पाठक को NOC देकर बना दिया हॉस्टल अधीक्षक
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही | ब्यूरो रिपोर्ट
जिले के शिक्षा विभाग में नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को उपकृत करने का एक नया मामला गरमाता जा रहा है। ताज़ा प्रकरण में एक शासकीय स्कूल के प्रधान पाठक (Headmaster) को विभाग द्वारा गुपचुप तरीके से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर छात्रावास अधीक्षक के पद पर पदस्थ कर दिया गया है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत की गई इस नियुक्ति ने विभाग की मंशा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या कहते हैं नियम?
सूत्रों के अनुसार, शासन के कड़े दिशा-निर्देश हैं कि किसी भी शैक्षणिक संस्था के प्रशासनिक प्रमुख (जैसे प्रधान पाठक) को उनके मूल पद से हटाकर अन्यत्र संलग्न या अन्य जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए। प्रधान पाठक स्कूल की शैक्षणिक और प्रशासनिक धुरी होता है। उसकी अनुपस्थिति में न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि स्कूल का पूरा अनुशासन और प्रबंधन बिखर जाता है। इसके बावजूद, आखिर किन परिस्थितियों में संबंधित अधिकारी ने NOC जारी की, यह जांच का विषय है।
शिक्षण व्यवस्था पर ‘दोहरी मार’
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एक तरफ सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूल के ‘कैप्टन’ को ही मैदान से बाहर कर हॉस्टल की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।प्रबंधन में कमी: प्रधान पाठक के बिना स्कूल की फाइलें और सरकारी योजनाएं अटकेंगी।
गुणवत्ता पर असर: शिक्षक और छात्र, दोनों के ऊपर प्रशासनिक नियंत्रण ढीला होगा।
नियमों की अनदेखी: क्या यह नियुक्ति किसी ‘प्रभाव’ या ‘सेटिंग’ के चलते की गई है?”अगर संस्था प्रमुख ही स्कूल में नहीं होगा, तो शैक्षणिक स्तर को बनाए रखना असंभव है। यह सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।” — एक सेवानिवृत्त शिक्षाविद
जांच की उठ रही मांग
इस विवादास्पद नियुक्ति के बाद स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े संगठनों में भारी रोष है। मांग की जा रही है कि इस पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो। आखिर इस ‘विशेष मेहरबानी’ के पीछे का सच क्या है? जिले की शिक्षा व्यवस्था की साख दांव पर लगी है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई करता है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा
Author: Ritesh Gupta
Professional JournalisT








