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152 काल्पनिक मकान, 250 गुमनाम लाभार्थी और करोड़ों का खेल: क्या होगी FIR या फिर लीपापोती में दबेगा मुआवज़ा घोटाला?”

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SECL दीपका परियोजना में भूमि अधिग्रहण के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा, CBI जांच के बाद भी जिम्मेदार अफसर और दलाल बेखौफ
कोरबा/कटघोरा! छत्तीसगढ़ की भूमि अधिग्रहण व्यवस्था पर अब सबसे बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है – क्या मुआवजा घोटाले में फर्जीवाड़ा करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी या एक बार फिर सिस्टम की मिलीभगत से गुनहगारों को बचा लिया जाएगा?
SECL की दीपका विस्तार परियोजना में उजागर हुआ यह घोटाला, सिर्फ एक आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक संरचना में जमी सड़ांध को बेनकाब करता है। ग्राम मलगांव का मामला इस घोटाले की सबसे शर्मनाक मिसाल बन चुका है, जहां अब तक 152 काल्पनिक मकान, 250 लाभार्थी जो सामने ही नहीं आ रहे, और 1638 नामों वाले मुआवजा पत्रक की जांच ने पूरे प्रशासनिक तंत्र की नींव हिला दी है।
—152 काल्पनिक मकान और अफसरों की चुप्पी!
प्रशासन के ही दस्तावेजों में दर्ज 152 मकानों का अस्तित्व आज तक ज़मीनी हकीकत में नहीं मिला। फिर भी इन पर मुआवजा की मोटी रकम जारी करने की तैयारी कर दी गई थी। सवाल यह है कि किसके हस्ताक्षर से यह मेजरमेंट बुक तैयार हुई? किन अफसरों ने आंख मूंदकर इन पर मुहर लगाई?
—सीबीआई ने की छापेमारी – फिर भी FIR लम्बित!
नामचीन दलालों मनोज गोभिल और श्यामू जायसवाल के खिलाफ शिकायत के बाद CBI की दबिश तक हो चुकी है। पांच फर्जी मुआवजा प्रकरण प्रमाणित भी हो गए, पर आज तक FIR दर्ज नहीं हुई। प्रशासनिक लीपापोती की यह सबसे बड़ी बानगी है। 27 फरवरी 2024 को बने फर्जी पत्रक में तहसीलदार, पटवारी और पीडब्ल्यूडी इंजीनियर के दस्तखत तक मौजूद हैं — फिर भी कार्रवाई लंबित है!
—कलेक्टर के आदेश, SDM की सक्रियता – लेकिन क्या होगा अंजाम?
कटघोरा SDM रोहित सिंह ने टीम के साथ जांच कर स्थिति की पोल खोल दी है, पर अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह जांच आरोपियों की गिरफ्तारी तक पहुंचेगी या रायपुर-दिल्ली की साजिशों में दबा दी जाएगी।
—मुआवज़ा नहीं ले रहे 250 ‘लाभार्थी’ – कौन हैं ये लोग?
ऐसे 250 लोग जिनके नाम मुआवजा पत्रक में हैं, सामने आने को तैयार नहीं। क्या यह 152 से भी बड़ी फर्जी संख्या है? या फिर पूरी योजना ही पहले से तय थी कि कागजों में मकान बना कर, मुआवज़ा डकार लिया जाए और लाभार्थी “गायब” हो जाएं?
—SECL-राजस्व गठजोड़: दलालों का नेटवर्क कितना गहरा?
सूत्रों की मानें तो मुआवजा में मोटी रकम हथियाने के लिए ग्राम रलिया, भिलाई बाजार और नराईबोध में अगली साजिशें पहले ही बुनी जा चुकी हैं। SECL के कुछ अधिकारी पहले ही दलालों को यह सूचना दे चुके हैं कि अधिग्रहण होना है। नतीजतन, वहां जमीनों पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिए गए हैं — कुछ अपने नाम पर, कुछ दूसरों के।
—प्रशासनिक अफसर और दलाल – साझेदारी की खुली पोल!
मलगांव में यह घोटाला SDM कौशल तेंदुलकर के कार्यकाल से शुरू हुआ, महिलांगे तक जारी रहा और अब रोहित सिंह के नेतृत्व में इसका खुलासा हुआ। सवाल यह है कि तीन बार सर्वे, तीन बार मेजरमेंट बुक, और 1638 नामों की सूची आखिर कैसे बनती रही, जब गांव की आधी से ज्यादा आबादी मौजूद ही नहीं थी?
— ‘दीपका हाउस’ की बैठक – जहां हुआ पूरा खेल!
‘दीपका हाउस’ की बंद बैठकें, मनोज गोभिल और श्यामू जायसवाल की मुख्य भूमिका और अफसरों की मौन स्वीकृति — ये सब दर्शाते हैं कि यह घोटाला एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें सत्ता, तंत्र और दलालों का संगठित गठजोड़ शामिल था।
0 अब सवाल यह नहीं कि घोटाला हुआ या नहीं — सवाल यह है कि क्या इस घोटाले पर FIR होगी या फिर सब कुछ रफादफा कर दिया जाएगा?
क्या प्रशासन इन भ्रष्ट अधिकारियों और दलालों को बचाने में लगा है?
क्या सीबीआई की छापेमारी के बाद भी जिम्मेदारों पर गिरफ्तारी नहीं होगी?
क्या मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचे इन दस्तावेज़ों पर कार्रवाई की मोहर लगेगी? और क्या रलिया-नराईबोध जैसे नए “घोटाला हॉटस्पॉट्स” पर कार्रवाई पहले से होगी या फिर एक और मलगांव बनने का इंतजार रहेगा?
✍ रिपोर्ट: रितेश कुमार गुप्ता
विशेष संवाददाता | Lallanguru News
कोरबा/मरवाही/रायपुर
Ritesh Gupta
Author: Ritesh Gupta

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