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मरवाही वनमंडल में भ्रष्टाचार का जंगल! छोटे पद, लेकिन करोड़ों की संपत्ति – अब EOW के शिकंजे में अधिकारी?

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मरवाही | विशेष रिपोर्ट✍️ मरवाही वनमंडल के अंदर वर्षों से जमे हुए वनकर्मियों की संपत्ति देख शासन तक सकते में है। सामान्य पदों पर पदस्थ कर्मचारी जिनकी सरकारी सैलरी लाख-दो लाख वार्षिक से ज़्यादा नहीं, उनके पास करोड़ों की ज़मीन-जायदाद और आलीशान बंगले कहां से आए—यह अब एक बड़ा सवाल बन चुका है।
🔍 सूत्रों के अनुसार, इन सभी कर्मचारियों के खिलाफ विस्तृत शिकायतें सबूतों के साथ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) को भेजी जा चुकी हैं। शिकायत में दस्तावेज, ज़मीन रजिस्ट्री, निर्माण कार्य की फोटो, बैंक लेनदेन की जानकारी, और नामजद आरोप शामिल हैं।—
🔥 करोड़पति वनकर्मियों की सूची – ईमानदारी पर सवाल!
1. उदय तिवारी (वनपाल) – रीवा निवासी, पंचम कॉलोनी में करोड़ों का मकान।
2. पुरुषोत्तम कश्यप (वायरलेस ऑपरेटर) – बनाधा मुड़ा टिकर, करोड़ों की संपत्ति।
5. रामजी नामदेव (कंप्यूटर ऑपरेटर) – टिकर, महंगी ज़मीन व शानदार मकान।
6. मंजुला उइके (सहायक ग्रेड-2) – सारबहरा मेन रोड, कीमती ज़मीन व निर्माणाधीन मकान।
7. वरुण राय (सहायक ग्रेड-2) – ऑक्सफोर्ड स्कूल के पास, आलीशान कोठी।
8. संतोष कुमार कांत (उपवन क्षेत्रपाल) – सारबहरा, किराये के लिए अलग से मकान निर्माण।
9. भूपेंद्र साहू (सहायक ग्रेड-2) – गौरेला और बिलासपुर, करोड़ों की ज़मीन-जायदाद।
10. रामनरेश तिवारी (वनपाल) – गौरेला, आलीशान मकान।
11. पन्नालाल जांगड़े (वनरक्षक) – गौरेला व बिलासपुर, इन्वेस्टमेंट प्रॉपर्टी।
12. सूर्य एम.डी.आई. मिश्रा (वनरक्षक) – पंचम कॉलोनी, 2 करोड़ की संपत्ति।
13. राजीव सिसोदिया (वनपाल) – गौरेला, कीमती ज़मीन के मालिक।
🚨 अब सवाल यह है:
इनकी आय के ज्ञात स्रोतों से इतनी संपत्ति कैसे?
क्या वन विभाग और शासन ने कभी इनकी संपत्ति की जांच करवाई? क्या EOW निष्पक्ष जांच कर पाएगी या फिर मामला दबा दिया जाएगा?
 जनता की मांग:
आय से अधिक संपत्ति के सभी मामलों में एफआईआर दर्ज हो।
सभी संदिग्धों को निलंबित कर जांच पूरी होने तक पद से हटाया जाए।
जांच में देरी पर लोकायुक्त और हाई कोर्ट के पर्यवेक्षण में जांच कराई जाए 👉 यह मामला अब सिर्फ वन विभाग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन की छवि और भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनता की आवाज़ बन चुका है। यही शासन ने अब भी इन पर संज्ञान नहीं लिया, तो आने वाले समय में मरवाही वनमंडल “वन नहीं, घोटालों का अड्डा” बनकर रह जाएगा।
Ritesh Gupta
Author: Ritesh Gupta

Professional JournalisT

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