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मरवाही: पौधा तैयारी के नाम पर फर्जी बिल-बाउचर बनाकर करोड़ों के गबन का आरोप, केंद्रीय नर्सरी सधवानी का मामला_

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मरवाही: पौधा तैयारी के नाम पर फर्जी बिल-बाउचर बनाकर करोड़ों के गबन का आरोप, केंद्रीय नर्सरी सधवानी का मामला
मरवाही / जीपीएम – मरवाही वनमंडल के खोडरी परिक्षेत्र अंतर्गत सधवानी केंद्रीय नर्सरी में पदस्थ वनरक्षक राकेश राठौर पर पौधा तैयारी और रोपण कार्य के नाम पर फर्जी बिल-बाउचर बनाकर करोड़ों रुपये गबन का गंभीर आरोप लगा हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में लगातार चर्चा बनी हुई है और शिकायतकर्ताओं ने इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
नर्सरी प्रभारी रहते हुए मिला था अतिरिक्त प्रभार
जानकारी के अनुसार, सधवानी परिसर रक्षक रहते हुए राकेश राठौर को केंद्रीय नर्सरी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। इसी दौरान उन्हें ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत दो स्थानों पर पौधरोपण का कार्य भी सौंपा गया था। आरोप है कि स्वीकृत क्षेत्रफल के अनुसार कार्य नहीं कराया गया और निर्धारित रकबे से कम क्षेत्र में ही पौधरोपण कराकर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया।
मजदूरों की जगह जेसीबी से खुदवाए गए गड्ढे
शिकायत में यह भी कहा गया है कि रोपण के लिए गड्ढों की खुदाई मजदूरों से कराई जानी थी, जिससे स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिल सके। लेकिन इसके विपरीत जेसीबी मशीन से खुदाई कराई गई। इससे मजदूरी के नाम पर बड़ी राशि का भुगतान दर्शाकर फर्जी बिल-बाउचर लगाने की आशंका जताई गई है।
जंगल से लाए गए छोटे पौधे, प्राक्कलन के अनुसार रोपण नहीं
आरोप यह भी है कि प्राक्कलन के अनुसार तैयार किए गए पौधों का रोपण नहीं कराया गया। इसके बजाय जंगल क्षेत्र से छोटे-छोटे पौधे एकत्रित कर उन्हें रोपित कर दिया गया और पौधा तैयारी के नाम पर लंबी राशि का बिल लगाया गया। बताया जाता है कि मजदूरी की राशि भी अपने करीबियों और रिश्तेदारों के खातों में डलवाकर गबन करने का आरोप लगाया गया है।
सीसीएफ की जांच में शिकायत सही पाई गई
मामले की शिकायत सीसीएफ बिलासपुर से की गई थी। उस समय पदस्थ सीसीएफ प्रभात मिश्रा ने स्वयं मौके पर जाकर रोपण कार्य की जांच की थी। जांच में शिकायत को सही पाए जाने पर खोडरी परिक्षेत्र सहायक उदय तिवारी और वनरक्षक राकेश राठौर को निलंबित कर अटैच कर दिया गया था।
निलंबन के बाद फिर उसी जगह पोस्टिंग
हालांकि आरोप है कि कुछ ही समय बाद प्रभाव और कथित रूप से पैसों के दम पर राकेश राठौर की बहाली हो गई और उनकी पोस्टिंग फिर से केंद्रीय नर्सरी सधवानी में कर दी गई। यह आदेश उस समय विभाग के अंदर चर्चा का विषय बना रहा। आरोप है कि तत्कालीन डीएफओ मरवाही ग्रीष्मी चांद द्वारा न तो आरोप पत्र जारी किया गया और न ही मामले में आगे की सख्त कार्रवाई की गई।
संपत्ति को लेकर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एक सामान्य वनरक्षक होने के बावजूद राकेश राठौर ने कथित रूप से फर्जी बिल-बाउचर और फर्मों से मिलीभगत कर कम समय में बड़ी संपत्ति अर्जित कर ली है। आरोप है कि गबन के पैसों से आलीशान मकान, चार पहिया वाहन और कृषि भूमि खरीदी गई है।
कई शिकायतें लंबित, कार्रवाई नहीं
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले को लेकर विभाग के पास दर्जनों शिकायतें लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि वनरक्षक राकेश राठौर की नौकरी लगने के समय से लेकर अब तक की चल-अचल संपत्ति की जांच कराई जाए। साथ ही मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लग सके!
Ritesh Gupta
Author: Ritesh Gupta

Professional JournalisT

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