कोरबा। कटघोरा में अपनी कड़क और जनता से जुड़ी पुलिसिंग के लिए मशहूर रहे निरीक्षक धर्म नारायण तिवारी (डीएन तिवारी) ने कोरबा कोतवाली की कमान संभाल ली है। इस तबादले के बाद से ही शहर की जनता राहत की सांस ले रही है, लेकिन नए कोतवाल के लिए यह सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होने वाला है।
कोतवाली क्षेत्र में पैर पसार चुके अपराध, नशे और बेपटरी व्यवस्था ने नए कप्तान के सामने चुनौतियों का एक लंबा अंबार खड़ा कर दिया है। आइए जानते हैं वो 4 बड़ी चुनौतियां, जिनसे निपटना नए कोतवाल के लिए सबसे पहली प्राथमिकता होगी:
1. नशे का गढ़ बनते सीतामढ़ी और मोतीसागर पारा
शहर का प्रवेश द्वार इमलीडुग्गु हो या फिर आंतरिक इलाके, शराब और गांजे का अवैध कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। सबसे डरावनी तस्वीर स्लम इलाकों से आ रही है, जहाँ 6 से 7 साल के मासूम बच्चे बोनफिक्स, सुलेशन और वेमीकोल जैसे केमिकल का जानलेवा नशा कर रहे हैं। सीतामढ़ी, मोतीसागर पारा, पुरानी बस्ती और राताखार जैसे इलाके अब नशेड़ियों के सेफ जोन बन चुके हैं। इन ठिकानों को ध्वस्त करना और सप्लायर्स पर ‘एंड-टू-एंड’ कार्रवाई करना पहली बड़ी चुनौती है।
2. नशे की आड़ में बढ़ती चाकूबाजी और चोरी
शहर में बढ़ती चोरी, झपटमारी, चाकूबाजी और यहाँ तक कि हत्या जैसी वारदातों के पीछे यही अवैध नशा है। कबाड़ के अवैध धंधे ने चोरों को बढ़ावा दिया है। अमनपसंद नागरिकों की मांग है कि इन कबाड़ियों और नशेड़ियों के खिलाफ एक ऐसी सख्त मुहिम चलाई जाए, जिससे अपराधियों में खौफ पैदा हो।
3. सरकारी शराब दुकानें और बेपटरी हुआ ट्रैफिक
कोरबा की सड़कों पर चलना अब किसी जंग से कम नहीं है। मुख्य रास्तों और मोड़ों पर हुए अतिक्रमण ने सड़कों को छोटा कर दिया है। रही-सही कसर सरकारी शराब दुकानों के सामने जुटने वाली पियक्कड़ों की भीड़ पूरी कर देती है। इस वजह से लगने वाले लंबे जाम और ट्रैफिक की बदहाली को पटरी पर लाना नए कोतवाल के लिए बड़ा इम्तिहान होगा।
4. देर रात तक सजने वाली ‘अड्डेबाजी’
रात ढलते ही शहर के प्रमुख चौराहों और सुनसान रास्तों पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। देर रात तक चलने वाली इस गुंडागर्दी और अड्डेबाजी के कारण राहगीरों, खासकर महिलाओं का निकलना दूभर हो गया है। शहर को इस अघोषित कर्फ्यू जैसे माहौल से मुक्ति दिलाने के लिए पुलिस की नाइट पेट्रोलिंग को नए सिरे से चुस्त-दुरुस्त करना होगा।
निरीक्षक डीएन तिवारी की गिनती पुलिस महकमे के उन अफसरों में होती है जो बिना किसी दबाव के काम करने के लिए जाने जाते हैं। कटघोरा की जनता के बीच उनकी लोकप्रियता इसकी गवाह है। अब देखना यह होगा कि क्या वे कोरबा शहर की इन ‘क्रॉनिक’ बीमारियों का इलाज कर पाते हैं या अपराधी उन पर भारी पड़ते हैं।
Author: Ritesh Gupta
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