वन विभाग की मिलीभगत से तिपान नदी में अवैध रेत उत्खनन का खेल, दिन-रात दौड़ रहे ट्रैक्टर
Gaurela pendra marwahi: मरवाही वन मंडल के पिपरिया स्थित तिपान नदी में इन दिनों अवैध रेत उत्खनन का खेल खुलेआम चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा कारोबार वन विभाग की नाक के नीचे और कथित मिलीभगत से संचालित होने की चर्चा जोरों पर है। दिन हो या रात, दर्जनों ट्रैक्टर नदी में उतरकर बेखौफ तरीके से रेत निकाल रहे हैं और शहरों तक उसकी सप्लाई कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक तिपान नदी में रोजाना सैकड़ों ट्रिप रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। मजदूर नदी के बीचों-बीच गड्ढे खोदकर ट्रैक्टरों में रेत भरते हैं और बिना किसी रोक-टोक के उसे बाहर ले जाते हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर वन क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध उत्खनन से जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी अनजान कैसे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की लापरवाही ही नहीं बल्कि रेत तस्करों से सांठगांठ के कारण यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। यही वजह है कि रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर नदी का सीना चीर रहे हैं।
लगातार हो रहे अवैध उत्खनन के कारण तिपान नदी में कई फीट गहरे गड्ढे बन चुके हैं। कभी सालभर पानी से भरी रहने वाली यह नदी अब अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसी तरह रेत की अंधाधुंध निकासी होती रही तो गर्मी के मौसम में नदी पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच सकती है।
इसका सीधा असर वन क्षेत्र और वहां रहने वाले जंगली जानवरों पर पड़ेगा। गर्मी के समय जब पानी के स्रोत कम हो जाते हैं, तब नदियां ही जंगली जीवों के लिए जीवनरेखा होती हैं। लेकिन अवैध उत्खनन के कारण पानी का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे वन्यजीवों के सामने गंभीर जल संकट खड़ा हो सकता है।
हालांकि वन विभाग की ओर से कभी-कभार खानापूर्ति की कार्रवाई जरूर की जाती है, लेकिन जिस तरह से तिपान नदी में खुलेआम अवैध रेत उत्खनन जारी है, उससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए सख्त कार्रवाई करता है या फिर रेत माफिया इसी तरह नदी और वन क्षेत्र के अस्तित्व से खिलवाड़ करते रहेंगे।
Author: Ritesh Gupta
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