कोरबा। प्रदेश के आबकारी मंत्री लखन देवांगन के गृह जिले में ही आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले में इन दिनों आबकारी विभाग की कार्रवाई से ज्यादा उसकी कार्यशैली चर्चा में है। खासकर आबकारी विभाग के उप निरीक्षक सुकांत पांडेय को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं, जिसने पूरे मामले को और गरमा दिया है।
स्थानीय व्यापारियों और लोगों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की आड़ में कहीं “अंदरखाने” कोई अलग ही खेल तो नहीं चल रहा। सूत्रों का कहना है कि कई जगहों पर कार्रवाई की खबरें जरूर आती हैं, लेकिन वहीं दूसरी तरफ यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कथित तौर पर मोटी रकम लेकर कुछ जगहों पर आंखें मूंद ली जाती हैं।
यही वजह है कि अब जिले में यह सवाल खुलकर उठने लगा है कि क्या आबकारी विभाग की कार्रवाई वास्तव में अवैध शराब पर लगाम लगाने के लिए है या फिर यह किसी बड़े वसूली तंत्र का हिस्सा बनती जा रही है। खास बात यह है कि जिस जिले से प्रदेश के आबकारी मंत्री लखन देवांगन आते हैं, वहीं इस तरह की चर्चाएं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इन आरोपों की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं। लोगों का यह भी कहना है कि लगातार उठ रही शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और भी संदेह पैदा कर रही है।
फिलहाल आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं। लेकिन जिले में अब यह मुद्दा तेजी से तूल पकड़ रहा है और राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक चर्चा का विषय बन चुका है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी और सच्चाई सामने आएगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।
Author: Saket Verma
A professional journalist








